Gulab Chand Kataria ने मंगलवार को चंडीगढ़ के मलोया क्षेत्र स्थित सरकारी स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। शहर के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे प्रशासक के साथ शिक्षा विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इस दौरान स्कूल परिसरों की साफ-सफाई, रखरखाव, शैक्षणिक माहौल और आधारभूत सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा की गई।
निरीक्षण में शिक्षा विभाग के सचिव, निदेशक स्कूल शिक्षा और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल रहे। हालांकि जून महीने में विद्यार्थियों की ग्रीष्मकालीन छुट्टियां चल रही हैं, इसके बावजूद प्रशासक ने स्कूल भवनों, कक्षाओं, खेल मैदानों और अन्य व्यवस्थाओं का मौके पर निरीक्षण किया।
बताया जा रहा है कि यह निरीक्षण 25 मई को आयोजित समाधान शिविर में अभिभावकों द्वारा उठाई गई शिकायतों के बाद किया गया। मलोया क्षेत्र के कई अभिभावकों ने सरकारी स्कूलों की खराब स्थिति को लेकर प्रशासन के सामने गंभीर सवाल खड़े किए थे।
अभिभावकों का आरोप था कि स्कूलों के मैदानों में घास उगी हुई है और कई जगहों पर टूटा-फूटा सामान पड़ा हुआ है। पुराने डेस्क, कबाड़ और अव्यवस्थित सामग्री स्कूल परिसर में जमा होने से बच्चों के लिए उचित वातावरण नहीं बन पा रहा। इसके साथ ही स्कूलों के शैक्षणिक स्तर को लेकर भी चिंता जताई गई।
सबसे बड़ी चिंता विद्यार्थियों की पढ़ाई को लेकर सामने आई। अभिभावकों ने दावा किया कि कई विद्यार्थियों की पढ़ने-लिखने की क्षमता अपेक्षित स्तर से काफी कमजोर है। शिकायतों के अनुसार कुछ आठवीं कक्षा के विद्यार्थी सामान्य पाठ पढ़ने में भी कठिनाई महसूस कर रहे हैं, जबकि नौवीं कक्षा के छात्रों को साधारण प्रार्थना-पत्र लिखने में परेशानी हो रही है।
निरीक्षण के दौरान प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने अधिकारियों को स्कूलों की स्थिति सुधारने और विद्यार्थियों की शिक्षा गुणवत्ता बेहतर बनाने के निर्देश दिए। प्रशासन अब स्कूलों की साफ-सफाई, मरम्मत और शैक्षणिक सुधार को लेकर नई कार्ययोजना तैयार कर सकता है।
चंडीगढ़ प्रशासन के इस निरीक्षण को सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति जानने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि अभिभावकों की शिकायतों के बाद प्रशासन कितनी तेजी से सुधारात्मक कार्रवाई करता है।








