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समय से पहले जन्मे बच्चों में बढ़ रहा अंधेपन का खतरा, चाइल्ड PGI के विशेषज्ञों ने जताई चिंता

नई दिल्ली। समय से पहले जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं में आंखों से जुड़ी गंभीर बीमारी रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी (ROP) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। चाइल्ड पीजीआई के नेत्र रोग विशेषज्ञों ने इस स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा है कि यदि समय रहते पहचान और उपचार न किया जाए तो यह बीमारी नवजात की दृष्टि को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव, अत्यधिक तनाव, खराब पोषण, कम या अधिक वजन, धूम्रपान और नशीली दवाओं के सेवन जैसे कारक समय से पहले प्रसव की संभावना बढ़ा सकते हैं। ऐसे मामलों में जन्म लेने वाले शिशुओं की आंखों का विकास पूरी तरह नहीं हो पाता, जिससे ROP का खतरा बढ़ जाता है।

क्या है रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी (ROP)?

Retinopathy of Prematurity एक गंभीर नेत्र रोग है, जो मुख्य रूप से समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों को प्रभावित करता है। इस बीमारी में आंख की रेटिना की रक्त वाहिकाएं सामान्य रूप से विकसित नहीं हो पातीं।

रेटिना आंख का वह हिस्सा होता है जो प्रकाश को ग्रहण कर मस्तिष्क तक दृश्य संकेत पहुंचाता है। यदि इसका विकास बाधित हो जाए तो बच्चे की दृष्टि पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है और कुछ मामलों में अंधेपन का खतरा भी पैदा हो सकता है।

सात-आठ महीनों में बढ़े मामले

चाइल्ड पीजीआई के विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले सात से आठ महीनों में ROP से प्रभावित नवजातों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह स्थिति स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि समय पर जांच न होने पर बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है।

किन शिशुओं में अधिक होता है खतरा?

वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ Dr. Divya Jain के अनुसार जो शिशु 30 से 32 सप्ताह की गर्भावस्था से पहले जन्म लेते हैं, उनमें ROP का खतरा सबसे अधिक होता है।

उन्होंने बताया कि समय से पहले जन्म लेने वाले अधिकांश नवजातों का वजन 1.5 किलोग्राम से कम होता है। ऐसे बच्चों की आंखों की रेटिना और नेत्र परदे का विकास पूरी तरह नहीं हो पाता, जिससे दृष्टि संबंधी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।

गर्भवती महिलाओं को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

विशेषज्ञों का कहना है कि ROP के जोखिम को कम करने के लिए गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इसके लिए—

  • संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
  • नियमित प्रसवपूर्व जांच कराएं।
  • धूम्रपान और नशीले पदार्थों से दूर रहें।
  • तनाव को नियंत्रित रखें।
  • वजन को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार संतुलित बनाए रखें।
  • किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

समय पर जांच से बच सकती है रोशनी

विशेषज्ञों के अनुसार समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों की आंखों की जांच जन्म के कुछ सप्ताह के भीतर करानी चाहिए। शुरुआती अवस्था में बीमारी की पहचान हो जाने पर लेजर थेरेपी और अन्य आधुनिक उपचारों के माध्यम से दृष्टि को सुरक्षित रखा जा सकता है।

चिकित्सकों का मानना है कि जागरूकता, समय पर स्क्रीनिंग और उचित उपचार के जरिए ROP से होने वाले अंधेपन के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है।

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