उत्तर प्रदेश में मानसून के आगमन का लंबा इंतजार आखिरकार समाप्त हो गया है। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने मंगलवार को सोनभद्र और महाराजगंज के रास्ते प्रदेश में प्रवेश कर लिया। मानसून की एंट्री के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में तेज हवाओं और बारिश का दौर शुरू हो गया है।
मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटों के भीतर मानसून पूरे उत्तर प्रदेश को अपनी चपेट में ले लेगा। इसके चलते प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।
मंगलवार सुबह से ही राजधानी लखनऊ सहित कानपुर नगर, अयोध्या, गोरखपुर, बरेली, देवरिया, सीतापुर, बहराइच, पीलीभीत, गोंडा, रायबरेली, ललितपुर, चित्रकूट, फर्रुखाबाद, जौनपुर, कानपुर देहात, उन्नाव, रामपुर और मुरादाबाद समेत कई जिलों में रुक-रुक कर बारिश दर्ज की गई। देवरिया और जौनपुर में कई स्थानों पर अच्छी बारिश होने से खेतों में पानी भर गया, जिससे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश के सभी 75 जिलों के लिए आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें से 38 जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। साथ ही कुछ इलाकों में बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं, जिसके मद्देनजर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
पिछले 24 घंटों के मौसम आंकड़ों पर नजर डालें तो आगरा प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 42.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के करीब 15 शहरों में बारिश रिकॉर्ड की गई।
मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून पिछले करीब 19 दिनों से उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा के आसपास सक्रिय होने के बावजूद आगे नहीं बढ़ पा रहा था। अब इसने सोनभद्र, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती और तराई क्षेत्रों के रास्ते प्रदेश में प्रवेश किया है।
आमतौर पर मानसून 20 जून तक उत्तर प्रदेश पहुंच जाता है, लेकिन इस वर्ष इसकी रफ्तार धीमी रही और यह लगभग 10 दिनों की देरी से आगे बढ़ा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, केरल तट से टकराने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून दो शाखाओं में विभाजित हो जाता है। पहली शाखा अरब सागर के रास्ते केरल, गुजरात और राजस्थान की ओर बढ़ती है, जबकि दूसरी शाखा बंगाल की खाड़ी के जरिए उत्तर और पूर्वी भारत में सक्रिय होती है। उत्तर प्रदेश में वर्षा मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी शाखा के प्रभाव से होती है और प्रदेश में इसकी एंट्री सामान्यतः पूर्वांचल क्षेत्र से ही होती है। इस बार भी मानसून ने इसी पारंपरिक मार्ग से प्रदेश में प्रवेश किया है।








