हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में संशोधन किया जाता है। हालांकि विशेष परिस्थितियों में तेल कंपनियां एक ही महीने में कई बार कीमतों में बदलाव कर सकती हैं। इसी साल मार्च 2026 में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में दो बार बढ़ोतरी की गई थी।
ऐसे में 1 जुलाई को जारी होने वाले नए रेट को लेकर उपभोक्ताओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में राहत मिलेगी या फिर महंगाई का एक और झटका लगेगा।
सबसे अधिक चिंता 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं को है। इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है।
दिल्ली में दिसंबर 2025 में 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर 1580.50 रुपये में उपलब्ध था। इसके बाद जनवरी 2026 में इसकी कीमत बढ़कर 1691.50 रुपये और फरवरी में 1740.50 रुपये हो गई।
फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और ईरान-इजरायल तथा अमेरिका से जुड़े घटनाक्रमों का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा था। इसके बावजूद 1 मार्च 2026 को जारी नई दरों में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में केवल 28 रुपये की बढ़ोतरी हुई और इसकी कीमत 1768.50 रुपये तक पहुंच गई।
हालांकि, इसके कुछ ही दिनों बाद 7 मार्च को उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा, जब 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम में 114.50 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई। इसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर 1883 रुपये हो गई।
महंगाई का सिलसिला यहीं नहीं रुका। 1 अप्रैल 2026 को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 2078.50 रुपये तक पहुंच गई। इंडियन ऑयल के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह महीनों में 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 1580.50 रुपये से बढ़कर 3113.50 रुपये तक पहुंच गई, यानी कुल 1533 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
कमर्शियल सिलेंडर की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संबंधी समस्याओं का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और स्ट्रीट फूड कारोबार पर पड़ा। कई जगहों पर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ी, जबकि कुछ छोटे कारोबारियों को अपना व्यवसाय बंद करने तक की नौबत आ गई।
हालांकि, सरकार द्वारा कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाए जाने के बाद कारोबारियों को कुछ राहत मिली है। अब सभी की निगाहें 1 जुलाई को जारी होने वाली नई कीमतों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगी कि एलपीजी उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी या महंगाई का दबाव और बढ़ेगा।








