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व्हेल की हड्डी से लेकर AI की भविष्यवाणी तक… अमेरिका ने जमीन के भीतर दफन किया 408 KG का टाइम कैप्सूल

अमेरिका अपनी स्वतंत्रता के 250 साल पूरे होने के ऐतिहासिक मौके पर भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक अनोखा तोहफा जमीन के नीचे दफन किया है। अमेरिका फिलाडेल्फिया के इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में 408 किलोग्राम का एक हाई-टेक टाइम कैप्सूल दफनाया गया है। इसे आज से ठीक 250 साल बाद यनी 2276 में खोला जाएगा।

दरअसल, अमेरिका द्वारा दफनाए जा रहे इस बेलनाकार कैप्सूल में अमेरिका की सोच, संस्कृति और तकनीक को समेटकर रखा गया है।

वैज्ञानिकों ने इसे सुरक्षित रखने के लिए ऐसी अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया है कि आने वाले ढाई सौ सालों तक इस पर पानी, जंग या मौसम की मार का कोई असर नहीं पड़ेगा।

इसकी जानकारी नेशनल पार्क सर्विस के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज की गई है, जिससे 250 साल बाद आने वाली पीढ़ियां इसे आसनी ढूंढ़ सकें और इसका अध्ययन कर सके।

क्या-क्या है इस कैप्सूल में ?

अमेरिका द्वारा जमीन के भीतर दफन किए इस 408 किलोग्राम वजनी कैप्सूल में 50 राज्यों और आम लोगों की ओर से चुनी गई यादगार चीजें रखी गई हैं। इसमें समें व्हेल की हड्डी, दुनिया के सबसे बड़े जिप्सम रेगिस्तान की रेत, राइट बंधुओं के विमान का कपड़ा, AI की भविष्यवाणी और कई ऐतिहासिक दस्तावेज शामिल हैं।

क्या होता है टाइम कैप्सूल?

टाइम कैप्सूल एक तरह का बंद पेटी या कंटेनर होता है, इसमें किसी जमाने की चीजें सुरक्षित रखी जाती है, ताकि आने वाली भविष्य की पीढ़ियां इसका अध्ययन कर स समय के समाज, तकनीक, संस्कृति और जीवन को समझ सकें।

इसे बनाने से अधिक मुश्किल 250 तक सुरक्षित रखना था, इसको जमीन के भीतर 250 साल तक कैसे सुरक्षित रखा जाए, इसके लिए कई विशेषज्ञों को शामिल किया गया। सालों तक चले रिसर्च के बाद ऐसा डिजाइन तैयार किया गया, जो पानी, नमी, जंग और मौसम के असर से कैप्सूल को बचा सके।

क्यों नहीं बनाया गया चौकोर?

वैज्ञानिकों के अनुसार, इसे अगर चौकोर बनाया जाएगा तो उसके कोने समय के साथ कमजोर पड़ सकते हैं, वहीं से सबसे अधिक पानी जाने का खतरा होता है, इसलिए इसे बेलनाकार बनाया गया।

जमीन के नीचे स्थापित करने से पहले इसे सील किया गया। इस कैप्सूल को खास धातु इंडियम के माध्यम से सील किया गया। यह एक ऐसी धातु होती है, जो ढक्कन बंद करते समय छोटी-से-छोटी दरार भर देती है। इससे कैप्सूल पूरी तरह सील हो जाता है और अंदर रखा समान लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।

4 जुलाई को इसे सिर्फ फिलाडेल्फिया में इसे जमीन से 10 फीट अंदर दफनाया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 10 फीट की गहराई पर तापमान में उतार-चढ़ाव कम होता है और मौस का कोई असर नहीं पड़ता है।

कैप्सूल का सबसे बड़ा दुश्मन पानी होता है, इसलिए इस ए कैप्सूल के ऊपर एक और स्टील का सिलेंडर लगाया जाएगा। दोनों के बीच हवा की एक परत रहेगी, जो बाहर से आने वाले पानी को रोकने में मदद करेगी।

इसे बनाने वाले एक वैज्ञानिक ने कहा कि यदि इस कैप्सूल के भीतर पानी पहुंचता है तो इसका मतला होगा कि फिलाडेल्फिया शहर करीब 6 फीट पानी में डूब चुका है। यदि ऐसा होता है तो टाइम कैप्सूल के साथ-साथ पूरी दुनिया एक बड़े प्राकृतिक संकट से जूझ रही होगी।

टाइम कैप्सूल दफनाने का क्या है मतलब?

अमेरिका यह टाइम कैप्सूल इसलिए दफना रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ी यह देख सकेगी कि 2026 का अमेरिका कैसा था। इसे एक बार सील करने के बाद तय समय तक नहीं खोला जाता। इसलिए 250 साल बाद लोग 2026 के अमेरिका को उसी रूप में देख पाएंगे, जैसा वह आज है।

भारत ने भी दफनाया था टाइम कैप्सूल

अमेरिका के अलावा भारत समेत दुनिया के कई देश भी टाइम कैप्सूल दफना चुके हैं। 1973 में भारत की आजादी के 25 साल पूरे होने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिल्ली के लाल किले के पास भारत का पहला सरकारी टाइम कैप्सूल दफन कराया था। इस टाइम कैप्सूल का नाम कालपात्र रखा गया।

इसे 1000 साल बाद खोलने की योजना थी, ताकि आने वाली पीढ़ियों को यह पता चल सकेगा कि आजादी के बाद भारत ने कैसे सफर तय किया। भारत के कालपात्र नामक कैप्सूल में संविधान की प्रति, स्वतंत्रता आंदोलन और आजादी के बाद के भारत का विस्तृत इतिहास, सरकारी दस्तावेज और उस दौर की अहम जानकारियां रखी गई थीं।

लेकिन साल 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनते ही उसे निकलवा लिया गया है। नई सरकार का आरोप था कि इसमें इतिहास को तत्कालीन सरकार और नेहरू-गांधी परिवार के नजरिए से पेश किया गया है। जिसके कारण यह सार्वजनिक बहस का मुद्दा बन गया। बाद में इसकी कुछ सामग्री संसद में दिखाई गई, लेकिन इसका पूरा रिकॉर्ड आजतक सार्वजनिक नहीं हुआ।#America #TimeCapsule #US250 #Philadelphia #History #Science #Technology #AI #WorldNews #India #Kalpatra #Future

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