इस्लामाबाद/त्रिपोली। पाकिस्तान की कूटनीतिक गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। एक ओर पाकिस्तान खुद को लीबिया के लंबे समय से जारी गृहयुद्ध को खत्म कराने के लिए मध्यस्थ की भूमिका में पेश करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उस पर हथियारों के संभावित सौदों को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं।
आलोचकों का दावा है कि पाकिस्तान की शांति पहल और हथियारों से जुड़े कथित समझौतों के बीच विरोधाभास नजर आता है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पाकिस्तान की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
लीबिया में वर्ष 2011 से राजनीतिक अस्थिरता और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। इस दौरान कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय शक्तियां वहां शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश करती रही हैं।
कुछ रिपोर्टों और विश्लेषणों में पाकिस्तान की विदेश नीति में चीन के प्रभाव का भी जिक्र किया गया है। आलोचक आरोप लगाते हैं कि क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों में पाकिस्तान की कई रणनीतियां चीन के हितों से प्रभावित होती हैं। हालांकि, इस संबंध में भी अलग-अलग पक्षों की अलग-अलग राय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश की मध्यस्थता भूमिका तभी प्रभावी मानी जाती है, जब उसकी नीतियों में पारदर्शिता और संघर्ष समाधान के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखाई दे।








