मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को बिहार में लागू शराबबंदी के प्रभाव पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि राज्य में सकारात्मक सामाजिक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में अब अधिक लोग पूजा-पाठ में रुचि ले रहे हैं और देवघर, वाराणसी (बनारस) तथा कुशीनगर जैसे धार्मिक स्थलों की यात्रा कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री का यह बयान शराबबंदी के सामाजिक प्रभाव को रेखांकित करने वाला माना जा रहा है। साथ ही इसे उन लोगों पर परोक्ष टिप्पणी के रूप में भी देखा जा रहा है, जो शराब के सेवन के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं।
‘नशामुक्त समाज से ही विकसित भारत का सपना होगा साकार’
पटना के लोक भवन मंडपम में आयोजित ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत–संकल्प अभियान’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत और समृद्ध बिहार का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है, जब समाज नशामुक्त बने।
उन्होंने इस अभियान के तहत देशभर में 10 करोड़ लोगों को नशामुक्ति का संकल्प दिलाने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
2016 में शराबबंदी को बताया साहसिक फैसला
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आर्थिक चुनौतियों के बावजूद बिहार में शराबबंदी लागू करने का साहसिक निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि उस समय राज्य की वित्तीय स्थिति आज जितनी मजबूत नहीं थी, फिर भी सरकार ने राजस्व से अधिक सामाजिक हित को प्राथमिकता दी और शराबबंदी लागू की।
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