हिमालय की दुर्गम और संवेदनशील पहाड़ियों के बीच यात्रा अब पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक हो गई है। कीरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना ने हिमाचल प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी की तस्वीर को काफी हद तक बदल दिया है। इस परियोजना से पहाड़ी इलाकों में आवागमन आसान होने के साथ यात्रा के समय में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
परियोजना की इस उपलब्धि में सुरंग निर्माण के लिए इस्तेमाल की जा रही न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) तकनीक की अहम भूमिका है। आधुनिक तकनीक के जरिए दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंगों का निर्माण संभव हुआ है, जिससे यात्रियों को कठिन और जोखिम भरे रास्तों से राहत मिली है।
कीरतपुर-मनाली फोरलेन के विकास का असर मनाली और चंडीगढ़ के बीच यात्रा पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जहां पहले इस दूरी को तय करने में करीब 10 घंटे लगते थे, वहीं अब यात्रा का समय घटकर लगभग साढ़े पांच घंटे रह गया है। इससे हिमाचल आने-जाने वाले यात्रियों के लिए सफर पहले की तुलना में तेज, सुगम और सुविधाजनक हो गया है।






