सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों के संचालन और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों का मूल उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से समाज की सेवा करना होना चाहिए, न कि उन्हें केवल मुनाफा कमाने वाली संस्थाओं के तौर पर संचालित किया जाए। मामले की सुनवाई जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने की।
पीठ ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में संचालित निजी विश्वविद्यालयों और संबंधित संस्थानों की ऑडिट रिपोर्ट पेश करें। इसके लिए छह सप्ताह की समयसीमा निर्धारित की गई है।
ऑडिट रिपोर्ट में देनी होगी ये जानकारी
ऑडिट रिपोर्ट में निजी संस्थानों को यह स्पष्ट करना होगा कि शैक्षणिक पाठ्यक्रम के दौरान छात्रों से कितनी फीस वसूली गई और उस राशि का इस्तेमाल किन मदों में किया गया। इसके अलावा फीस से प्राप्त रकम में से बची राशि का उपयोग या निवेश कहां किया गया, इसकी जानकारी भी देनी होगी।
संस्थानों को अपने शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी भी रिपोर्ट में शामिल करनी होगी। इसमें नियुक्तियों, वेतन और सेवा की शर्तों समेत अन्य संबंधित विवरण देने होंगे।
इसके साथ ही निजी संस्थानों को सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई जमीन, उन्हें मिली कानूनी छूट या अन्य रियायतों का भी ब्योरा देना होगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का उद्देश्य निजी विश्वविद्यालयों की वित्तीय गतिविधियों और उनके संचालन में पारदर्शिता से जुड़ी जानकारी सामने लाना है।






