नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में किए गए बदलाव को लेकर चुनाव आयोग के भीतर और राजनीतिक स्तर पर विवाद तेज हो गया है। ऑनलाइन फॉर्म में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़ा एक नया घोषणा खंड जोड़ा गया, जिसमें पहली बार मतदाता बनने वाले आवेदकों से उनके माता-पिता या दादा-दादी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी मांगी गई।
इस बदलाव पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति दर्ज कराई। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने मई में ही सवाल उठाया था कि वैधानिक Form 6 में बदलाव के लिए Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन की जरूरत होगी।
क्या बदला Form 6 में?
Form 6 भारत में पहली बार मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला आवेदन पत्र है। नए ऑनलाइन संस्करण में SIR से संबंधित एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई। इसमें आवेदक से पूछा गया कि क्या उसका नाम पिछली SIR के दौरान मतदाता सूची में था। यदि नहीं, तो क्या उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस सूची में दर्ज था। तीसरे विकल्प में यह बताना था कि न तो आवेदक और न ही उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस सूची में था।
हालांकि इस हिस्से को गैर-अनिवार्य बताया गया था, रिपोर्ट के मुताबिक इसके जवाब के बिना ऑनलाइन Form 6 जमा नहीं किया जा सकता था। यही बात विवाद का एक प्रमुख कारण बनी।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
चुनाव आयुक्तों की आपत्ति का मुख्य आधार यह था कि Form 6 एक वैधानिक फॉर्म है। उनके अनुसार, इसे केवल प्रशासनिक निर्देश के जरिए बदला नहीं जा सकता। इसके लिए संबंधित नियमों में औपचारिक संशोधन की प्रक्रिया अपनानी होगी।
इस मुद्दे पर दोनों आयुक्तों ने अपनी असहमति दर्ज कराई। रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले करीब 10 महीनों में SIR से जुड़े विभिन्न फैसलों और आदेशों पर दोनों आयुक्तों की ओर से कई लिखित आपत्तियां दर्ज की गईं।
समझिए पूरे मामले के 5 प्रमुख किरदार
1. ज्ञानेश कुमार
ज्ञानेश कुमार मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। Form 6 और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर विपक्ष की ओर से उनके कामकाज पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों की खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि बहु-सदस्यीय संस्था में चर्चा, सुझाव और असहमति सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
2. सुखबीर सिंह संधू
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने Form 6 में किए गए बदलाव सहित SIR से जुड़े कई मुद्दों पर आपत्ति दर्ज की। उनका तर्क था कि वैधानिक फॉर्म में बदलाव के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
3. विवेक जोशी
चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने भी Form 6 में SIR से संबंधित बदलाव पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि SIR के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले विशेष फॉर्म और वैधानिक Form 6 की कानूनी स्थिति अलग है और Form 6 में बदलाव के लिए नियमों में संशोधन जरूरी है।
4. सीमा खन्ना
चुनाव आयोग की आईटी व्यवस्था से जुड़ी अधिकारी सीमा खन्ना का नाम भी इस पूरे विवाद में सामने आया है। ECINet जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और चुनावी डेटा के प्रबंधन को लेकर आयोग के भीतर सवाल उठाए गए हैं।
5. टीवी सोमनाथन
कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन का नाम भी चुनाव आयुक्तों के आंतरिक पत्राचार और आपत्तियों के संदर्भ में सामने आया है। इस वजह से वह भी पूरे घटनाक्रम के प्रमुख किरदारों में शामिल हैं।
Form 6 को लेकर विवाद का असर क्या हो सकता है?
इस विवाद का सबसे अहम पहलू यह है कि नए मतदाता बनने की प्रक्रिया में पुराने SIR रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी की भूमिका कितनी होनी चाहिए। आलोचकों का कहना है कि पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध न होने या तकनीकी दिक्कतों के कारण पहली बार वोटर बनने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है। वहीं चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर उठे सवालों को संस्था के भीतर होने वाली सामान्य प्रशासनिक चर्चा का हिस्सा बताया है।
इस तरह Form 6 में जोड़ा गया नया SIR-संबंधित खंड अब केवल तकनीकी बदलाव का मुद्दा नहीं रह गया है। यह वैधानिक प्रक्रिया, नए मतदाताओं के पंजीकरण, चुनावी डेटा और निर्वाचन आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े व्यापक सवालों का केंद्र बन गया है।#Form6 #ElectionCommission #SIR #VoterList #NewVoters #ECI #GyaneshKumar #ElectionNews #VoterRegistration #IndiaNews






