SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर चल रहे विवाद के बीच ‘Mark VIP’ फीचर पर चुनाव आयोग के अधिकारियों ने सफाई दी है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रमुख या महत्वपूर्ण मतदाताओं को ‘मार्क्ड इलेक्टर’ के तौर पर चिन्हित करने की प्रक्रिया नई नहीं है। यह व्यवस्था SIR से पहले होने वाली Special Summary Revision यानी SSR के दौरान भी लागू थी।
चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, 29 मई 2023 के SSR से जुड़े निर्देशों में सांसदों, विधायकों, एमएलसी, घोषित पदों पर बैठे लोगों और कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल, न्यायपालिका तथा सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े प्रमुख लोगों को ‘मार्क्ड इलेक्टर’ के तौर पर चिन्हित करने का प्रावधान था। इसी तरह के निर्देश 2025 में बिहार में हुए SIR के दौरान भी दिए गए थे।
अधिकारियों का कहना है कि ‘VIP’ शब्द खुद SIR या SSR के आधिकारिक निर्देशों में इस्तेमाल नहीं किया गया था। उनके मुताबिक, BLO ऐप में मौजूद यह व्यवस्था ऐसे प्रमुख मतदाताओं की पहचान करने, उन्हें ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल रखने और जरूरत पड़ने पर दस्तावेज या नोटिस से जुड़ी जानकारी को समय पर अपडेट करने में मदद करती है।
दरअसल, BLO ऐप में ‘Mark VIP’ फीचर सामने आने के बाद इसे लेकर सवाल उठे थे। खास तौर पर दिल्ली में कई चर्चित लोगों को SIR के दौरान नोटिस मिलने के बाद यह मुद्दा चर्चा में आया। हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक किसी मतदाता को ‘मार्क्ड’ करने का मतलब उसे दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया से छूट देना नहीं है।
अब चुनाव आयोग की इस सफाई के बाद ‘Mark VIP’ फीचर और SIR को लेकर चल रही बहस में पुराने नियमों और मौजूदा ऐप व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। #SIR #ElectionCommission #ECI #MarkVIP #VIPVoter #GyaneshKumar #VoterList #SpecialIntensiveRevision #SSR #ElectionNews #PoliticalNews #IndiaNews






