नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में भारत की लोकतांत्रिक परंपरा, डिजिटल क्रांति और तकनीकी विकास पर अपने विचार रखे। उन्होंने भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए कहा कि देश में विभिन्न भाषाओं, मीडिया संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को अपनी बात रखने और मुद्दों पर चर्चा करने के व्यापक अवसर मिलते हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में सैकड़ों भाषाएं बोली जाती हैं और यहां हजारों पंजीकृत समाचार पत्र एवं प्रकाशन मौजूद हैं। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर भारत के 50 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं। उनके मुताबिक, डिजिटल माध्यमों ने लोगों के बीच संवाद को आसान बनाया है और लोकतांत्रिक चर्चा को नई गति दी है।
डिजिटल क्रांति ने बढ़ाए अवसर
पीएम मोदी ने डिजिटल कनेक्टिविटी और सस्ते इंटरनेट की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद मोबाइल डेटा को किफायती बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों से लोगों की डिजिटल सेवाओं तक पहुंच बढ़ी है। अब छोटे शहरों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए भी ऑनलाइन शिक्षा और ज्ञान के नए अवसर उपलब्ध हैं।
प्रधानमंत्री के अनुसार, इंटरनेट और डिजिटल तकनीक का महत्व केवल लोगों को आपस में जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे शिक्षा, जानकारी और अवसरों तक पहुंच भी आसान हुई है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोग विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखते हैं और लोकतांत्रिक तरीके से बहस करते हैं।
तकनीक, डेटा और नवाचार को बताया नई ताकत
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के विषय का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में शक्ति के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार वैश्विक स्तर पर प्रभाव और प्रगति के महत्वपूर्ण आधार बन रहे हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि असली सवाल केवल यह नहीं है कि शक्ति किसके पास है, बल्कि यह भी है कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है। तकनीक का लाभ कुछ लोगों तक सीमित रहने के बजाय लाखों लोगों तक कैसे पहुंचाया जा सकता है, इस पर विचार करना जरूरी है।
नियंत्रण नहीं, सशक्तीकरण होना चाहिए लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने शक्ति के इस्तेमाल को लेकर एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य दूसरों को सशक्त बनाना होना चाहिए। उन्होंने ‘पावर टू एम्पावर’ यानी लोगों को सक्षम बनाने की अवधारणा पर जोर दिया।
उनके संबोधन का मुख्य संदेश यह रहा कि तकनीक और संसाधनों का उपयोग लोगों की क्षमताएं बढ़ाने, नए अवसर उपलब्ध कराने और समावेशी विकास को आगे बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने नियंत्रण की मानसिकता से आगे बढ़कर लोगों को सक्षम बनाने और प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग को भी महत्व देने की बात कही।
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम का आयोजन 13 से 15 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में किया जा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक, बदलते शक्ति संतुलन और भविष्य की आर्थिक संभावनाओं जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है।
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