Pakistan में दो हिंदू युवाओं ने संघीय सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर मिसाल पेश की है। Federal Public Service Commission द्वारा गुरुवार को घोषित परिणामों में सिंध प्रांत के जीवन रेबारी और खेम चंद जंदोरा का नाम सफल उम्मीदवारों में शामिल है।
इन दोनों की सफलता खास मानी जा रही है, खासकर जीवन रेबारी की, जिन्होंने किसी अल्पसंख्यक कोटा का सहारा लिए बिना सामान्य श्रेणी में अपनी योग्यता के दम पर यह उपलब्धि हासिल की।
170 उम्मीदवार हुए चयनित
इस परीक्षा में देशभर से 12,792 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था, जिनमें से 355 उम्मीदवार लिखित परीक्षा में सफल हुए। अंतिम परिणाम में कुल 170 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, जिनमें ये दोनों भी शामिल हैं।
करीब 38 लाख की आबादी के साथ हिंदू समुदाय पाकिस्तान का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक वर्ग है, जो मुख्य रूप से सिंध प्रांत में निवास करता है। इसके बावजूद सिविल सेवा में उनका प्रतिनिधित्व लंबे समय से सीमित रहा है।
संघर्ष की प्रेरक कहानी
BBC की रिपोर्ट के अनुसार, खेम चंद जंदोरा की सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा त्याग है। उनके माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई जारी रखने के लिए अपने गहने तक बेच दिए।
वहीं जीवन रेबारी ने बेहद कठिन परिस्थितियों में अपनी पढ़ाई पूरी की। संसाधनों की कमी के चलते वे एक गुरुद्वारे में रहते थे और लंगर के सहारे अपनी दैनिक जरूरतें पूरी करते हुए तैयारी करते रहे।
इन दोनों की उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गई है।
#Pakistan #HinduCommunity #CivilServices #SuccessStory #Inspiration #Minorities






















