पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बैंक खातों को फ्रीज करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि केवल संदिग्ध लेनदेन की छोटी राशि के आधार पर पूरे बैंक खाते को सील करना कानूनसम्मत नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि खाताधारक किसी एफआईआर में नामजद नहीं है और मजिस्ट्रेट का वैधानिक आदेश भी मौजूद नहीं है, तो ऐसी कार्रवाई उचित नहीं होगी।
यह टिप्पणी जस्टिस जगमोहन बंसल की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान की।
एक सप्ताह में खाता डी-फ्रीज करने के निर्देश
अदालत ने त्रिपत जीत सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए HDFC Bank को निर्देश दिया कि उनका बैंक खाता एक सप्ताह के भीतर डी-फ्रीज किया जाए।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि उनका बैंक खाता बिना किसी पूर्व सूचना के फ्रीज कर दिया गया था। बैंक ने यह कार्रवाई कथित तौर पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के निर्देश पर की थी।
अदालत ने उठाए कानूनी सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी खाते में संदिग्ध लेनदेन पाए जाने पर जांच एजेंसियों को कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करनी चाहिए। केवल छोटी राशि के विवाद या जांच के आधार पर पूरे खाते को बंद कर देना नागरिक अधिकारों और बैंकिंग प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
हाई कोर्ट की इस टिप्पणी को बैंकिंग और साइबर अपराध जांच से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाईलाइट्स
- पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी
- बिना वैधानिक आदेश पूरा बैंक खाता फ्रीज करना गलत
- खाताधारक एफआईआर में नामजद नहीं था
- HDFC बैंक को एक सप्ताह में खाता डी-फ्रीज करने के निर्देश
- जस्टिस जगमोहन बंसल की पीठ ने सुनाया फैसला
- बैंक खातों की फ्रीजिंग प्रक्रिया पर उठे कानूनी सवाल
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