दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माने जाने वाले United States के सामने अब गंभीर आर्थिक चुनौतियां खड़ी होती दिखाई दे रही हैं। पहली बार ऐसा हुआ है जब अमेरिका का सार्वजनिक कर्ज उसकी कुल जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) से भी अधिक हो गया है। इस स्थिति ने वैश्विक वित्तीय बाजारों और निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
आंकड़ों के अनुसार, मार्च के अंत तक अमेरिका पर करीब 31.27 लाख करोड़ डॉलर का सार्वजनिक कर्ज हो चुका था, जबकि देश की कुल जीडीपी लगभग 31.22 लाख करोड़ डॉलर रही। इसका मतलब यह है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था जितनी उत्पादन क्षमता रखती है, उससे अधिक का बोझ अब कर्ज के रूप में उस पर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल आर्थिक आंकड़ा नहीं, बल्कि दीर्घकालिक वित्तीय जोखिम का संकेत भी है। लगातार बढ़ते सरकारी खर्च, ब्याज भुगतान और वैश्विक तनावों ने अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है।
इसी बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भी अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Israel और अमेरिका की ओर से Iran के खिलाफ बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बाद खाड़ी देशों में असहजता बढ़ी है। माना जा रहा है कि कुछ खाड़ी देश अब अमेरिका में किए गए अपने बड़े निवेश की समीक्षा कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, खाड़ी देशों का अमेरिका में करीब दो लाख करोड़ डॉलर का निवेश है। इसमें अमेरिकी सरकारी बॉन्ड, शेयर बाजार, रियल एस्टेट और रक्षा क्षेत्र में निवेश शामिल है। यदि इन देशों ने बड़े पैमाने पर निवेश निकालना शुरू किया, तो अमेरिकी बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि अमेरिकी वित्तीय प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत उसकी खुली निवेश व्यवस्था रही है, जहां विदेशी निवेशक कभी भी पैसा लगा और निकाल सकते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में यही खुलापन जोखिम का कारण भी बन सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि वैश्विक निवेशकों का भरोसा कमजोर होता है, तो अमेरिकी बॉन्ड बाजार, डॉलर की स्थिति और शेयर बाजार पर व्यापक असर पड़ सकता है। हालांकि, अमेरिका अब भी दुनिया की सबसे प्रभावशाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन बढ़ता कर्ज और भू-राजनीतिक तनाव आने वाले समय में नई चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं।
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