West Bengal में अब सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध करना केवल सामाजिक और धार्मिक विवाद का विषय नहीं रहेगा, बल्कि इसे कानूनन गंभीर अपराध की श्रेणी में माना जाएगा। Calcutta High Court के सख्त रुख के बाद राज्य की भाजपा सरकार ने ‘पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950’ को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए नई अधिसूचना जारी कर दी है।
सरकार की ओर से जारी आठ सूत्रीय अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह कदम हाई कोर्ट के 2018 के ऐतिहासिक फैसले और वर्ष 2022 में जारी सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है। अधिसूचना के जरिए प्रशासन को सार्वजनिक स्थलों पर पशु बलि, खुले में वध और अवैध बूचड़खानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों को निगरानी बढ़ाने और नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना, स्वच्छता मानकों को लागू करना और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है। वहीं, इस कदम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा भी तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार पर कानून के सख्त अनुपालन का दबाव था। ऐसे में नई अधिसूचना को उसी दिशा में बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
हालांकि, कुछ सामाजिक और धार्मिक संगठनों की ओर से इस फैसले पर प्रतिक्रिया आने की संभावना भी जताई जा रही है। फिलहाल प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में विभिन्न जिलों में विशेष अभियान चलाकर नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
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