France ने सोमवार 1 जून को अटलांटिक महासागर में एक रूसी तेल टैंकर को हिरासत में ले लिया, जिसके बाद Russia और फ्रांस के बीच तनाव बढ़ गया है। मॉस्को ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस द्वारा ‘टैगोर’ नामक टैंकर को जब्त किए जाने पर क्रेमलिन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। क्रेमलिन के प्रवक्ता Dmitry Peskov ने कहा कि रूस इस कदम को पूरी तरह गैर-कानूनी मानता है।
पेस्कोव ने बयान में कहा कि जहाज को हिरासत में लेना “अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद” जैसी कार्रवाई की सीमा तक पहुंचता है। उन्होंने चेतावनी दी कि रूस अपने समुद्री शिपिंग ऑपरेशन्स और कार्गो परिवहन की सुरक्षा के लिए आवश्यक और कठोर कदम उठाएगा।
हालांकि फ्रांस की ओर से टैंकर जब्त करने के पीछे के कारणों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। लेकिन इस घटना ने पहले से तनावपूर्ण यूरोपीय सुरक्षा और ऊर्जा माहौल को और संवेदनशील बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और पश्चिमी देशों के बीच ऊर्जा, समुद्री व्यापार और प्रतिबंधों को लेकर टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में समुद्री मार्गों पर होने वाली घटनाएं वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर डाल सकती हैं।
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