अमेरिका और इजरायल के दशकों पुराने रणनीतिक रिश्तों में इन दिनों तनाव और अविश्वास की परतें गहराती नजर आ रही हैं। वॉशिंगटन से सामने आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने दोनों देशों के बीच बढ़ती दूरी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने इजरायल की कथित जासूसी गतिविधियों को लेकर अपनी चिंता का स्तर बेहद बढ़ा दिया है और आंतरिक तौर पर इजरायल से जुड़े काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे को ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में डाल दिया गया है।
बताया जा रहा है कि यह अमेरिकी रक्षा विभाग की सबसे गंभीर चेतावनी श्रेणी मानी जाती है। इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि अमेरिका और इजरायल को लंबे समय से सबसे करीबी सहयोगी देशों में गिना जाता रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया की रणनीति और ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बढ़ती रणनीतिक असहमति ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) द्वारा तैयार किए गए सात पन्नों के एक आंतरिक मूल्यांकन दस्तावेज में दावा किया गया है कि इजरायल की मानव खुफिया (Human Intelligence) और तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance) क्षमता बेहद आक्रामक और प्रभावशाली है। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि इजरायली एजेंसियां संवेदनशील सूचनाएं हासिल करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों और व्यापक नेटवर्क का इस्तेमाल करती हैं।
रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि अब अमेरिकी अधिकारी इजरायल की यात्राओं के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं। सुरक्षा कारणों से वे अस्थायी लैपटॉप, सीमित डेटा वाले उपकरण और ‘बर्नर फोन’ यानी एक बार इस्तेमाल किए जाने वाले मोबाइल फोन का उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही होटल के कमरों और मीटिंग स्थलों पर भी विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि संवेदनशील चर्चाओं और सरकारी गतिविधियों पर निगरानी रखने की कोशिशें बढ़ सकती हैं। यही वजह है कि अब अमेरिका अपने अधिकारियों को डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा के लिए पहले से अधिक सख्त निर्देश दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रिपोर्ट पूरी तरह सही साबित होती है, तो इससे अमेरिका-इजरायल संबंधों में बड़ा कूटनीतिक असर देखने को मिल सकता है। दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग, खुफिया साझेदारी और पश्चिम एशिया की रणनीति पर इसका प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक न तो पेंटागन की ओर से कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान जारी किया गया है और न ही इजरायल सरकार ने इन दावों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। लेकिन वॉशिंगटन में इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राजनीतिक और सुरक्षा गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
दुनिया भर की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह तनाव सिर्फ खुफिया एजेंसियों तक सीमित रहेगा या आने वाले समय में अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।#AmericaIsraelRelations #Pentagon #IsraelSpyRow #DonaldTrump #BenjaminNetanyahu #USDefense #MiddleEastTension #IranConflict #Washington #Geopolitics








