केंद्र सरकार ने कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और केसिंग हेड कंडेनसेट के लिए रॉयल्टी दरों और प्रक्रियाओं को तर्कसंगत बनाते हुए बड़ा बदलाव किया है। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य ऑयल एंड गैस सेक्टर में नियमों को अधिक सरल, पारदर्शी और निवेश के अनुकूल बनाना है।
सरल शब्दों में कहें तो अब जमीन या समुद्र से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस निकालने वाली कंपनियों के लिए नियम पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और आसान होंगे। इससे अपस्ट्रीम ऑयल एंड गैस सेक्टर में निवेश बढ़ने और उत्पादन गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा करते हुए इसे देश के अपस्ट्रीम सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि ऑयल सेक्टर (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट के तहत रॉयल्टी व्यवस्था का रेशनलाइजेशन ऑयल और गैस सेक्टर में एक नए दौर की शुरुआत करेगा।
मंत्री ने कहा कि इस फैसले से लंबे समय से मौजूद कई कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी और अपस्ट्रीम क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। उनके अनुसार यह ऐतिहासिक निर्णय नियामक स्पष्टता बढ़ाने और उद्योग को अधिक स्थिर वातावरण प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
सरकार के इस कदम से घरेलू ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ निजी और विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।
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