सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर सरकार की आलोचना करने वाली पोस्ट हटाए जाने के आरोपों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके समेत कई लोगों ने दावा किया है कि सरकार की आलोचना करने वाले कंटेंट को प्लेटफॉर्म से हटाया जा रहा है। इस मामले में व्यंग्यकार वरुण ग्रोवर और कानूनी समाचार वेबसाइट लाइव लॉ ने भी अपनी पोस्ट हटाए जाने की शिकायत की है। हालांकि, इन आरोपों पर केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हुई है।
अभिजीत दीपके ने 28 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि रोजाना हजारों पोस्ट और अकाउंट हटाए जा रहे हैं। दीपके का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोग सरकार से सवाल पूछते हैं और अपनी समस्याएं सामने रखते हैं। ऐसे में पोस्ट या अकाउंट हटाने से लोगों के सवाल खत्म नहीं होंगे।
दीपके ने चेतावनी दी कि इस तरह की कथित सेंसरशिप से सरकार और जनता के बीच अविश्वास बढ़ सकता है। उनके सहयोगी आशुतोष रांका ने भी दावा किया कि भारत में हजारों इंस्टाग्राम अकाउंट प्रतिबंधित किए गए हैं और बड़ी संख्या में वीडियो हटाए गए हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
इस विवाद में गीतकार और व्यंग्यकार वरुण ग्रोवर का मामला भी सामने आया है। ग्रोवर ने आरोप लगाया कि सरकार के वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य पर लिखी गई उनकी व्यंग्यात्मक कविता के म्यूजिकल वीडियो को इंस्टाग्राम से हटा दिया गया। उन्होंने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए एक्स पर इंस्टाग्राम के संदेश का स्क्रीनशॉट भी साझा किया। रिपोर्टों के मुताबिक, प्लेटफॉर्म के संदेश में भारतीय कानून के तहत कंटेंट प्रतिबंधित किए जाने की बात कही गई थी।
वहीं, कानूनी समाचार वेबसाइट लाइव लॉ ने भी अपनी एक रील हटाए जाने की शिकायत की है। वेबसाइट के अनुसार, यह रील सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे से संबंधित थी। लाइव लॉ का दावा है कि इंस्टाग्राम ने उसे यह कहते हुए प्रतिबंधित किया कि कंटेंट पर रोक लगाने के लिए कानूनी अनुरोध मिला है। वेबसाइट ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
एक अन्य व्यंग्यकार ने भी दावा किया कि इंस्टाग्राम पर सरकार की आलोचना करने वाले कंटेंट को निशाना बनाया जा रहा है। इन शिकायतों के बाद सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, ऑनलाइन सेंसरशिप और सरकारी निर्देशों के तहत कंटेंट हटाने की प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है।
यहां यह समझना जरूरी है कि किसी पोस्ट को हटाए जाने की घटना और उसके पीछे केंद्र सरकार की सीधी भूमिका होने का आरोप दो अलग-अलग बातें हैं। फिलहाल संबंधित लोगों ने अपने अनुभव और दावे सार्वजनिक किए हैं, लेकिन प्रत्येक मामले में आदेश जारी करने वाले प्राधिकरण, कानूनी आधार और कार्रवाई की पूरी जानकारी स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना जरूरी है।
अब सवाल यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकार की आलोचना करने वाले कंटेंट को हटाने के मामलों में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाए और यूजर्स को इसके खिलाफ अपील करने का कितना अवसर मिलता है। इस पूरे विवाद पर केंद्र सरकार और इंस्टाग्राम की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
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