कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में एक अकादमिक की नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यूनिवर्सिटी की फैकल्टी ऑफ एजुकेशन में असिस्टेंट रिसर्च प्रोफेसर के पद पर कार्यरत फराह अहमद के पुराने विचारों और प्रतिबंधित इस्लामी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर से उनके पूर्व संबंधों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कैम्ब्रिज की आधिकारिक वेबसाइट पर फराह अहमद को फैकल्टी ऑफ एजुकेशन में असिस्टेंट रिसर्च प्रोफेसर के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, फराह अहमद पहले हिज्ब-उत-तहरीर से जुड़ी रही हैं। 2009 में ब्रिटिश संसद में भी उनके संगठन से पूर्व संबंधों और उनके शैक्षणिक विचारों को लेकर चर्चा हुई थी। बाद में अहमद ने संगठन से दूरी बनाने की बात कही थी। ब्रिटेन की संसद में पेश दस्तावेजों के अनुसार, उन्होंने 2009 में हिज्ब-उत-तहरीर से इस्तीफा दिया था।
हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अहमद ने हिज्ब-उत-तहरीर से जुड़े एक प्रकाशन Education and Identity में पश्चिमी शिक्षा को लेकर आलोचनात्मक विचार व्यक्त किए थे। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें पश्चिमी शिक्षा को ब्रिटेन में रहने वाले मुसलमानों के धार्मिक विश्वासों और मूल्यों के लिए खतरा बताया गया था। साथ ही, ब्रिटिश स्कूलों में मुस्लिम बच्चों के एकीकरण और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
अहमद के पुराने बयानों में लोकतंत्र की भी आलोचना किए जाने का उल्लेख मिलता है। 2009 में ब्रिटिश संसद में उनके कथित विचारों का जिक्र करते हुए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम को ‘systemic indoctrination’ और लोकतंत्र को ‘corrupt tradition’ बताए जाने के आरोप सामने आए थे।
हालांकि, यह मामला उनके पुराने विचारों से जुड़ा है। 2010 में अहमद ने ब्रिटिश Charity Commission के समक्ष कहा था कि वह पहले हिज्ब-उत-तहरीर की सदस्य रही थीं, लेकिन कई वर्षों से संगठन से जुड़ी नहीं थीं और राजनीतिक संगठन के तौर पर हिज्ब-उत-तहरीर के सभी विचारों से सहमत नहीं थीं। Charity Commission की जांच में भी बाद में यह दर्ज किया गया कि संगठन और संबंधित संस्था के बीच उस समय कोई संबंध नहीं था।
फराह अहमद की नियुक्ति ऐसे समय चर्चा में आई है, जब कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के एक अन्य प्रोफेसर जेसन अर्डे भी विवादों में रहे हैं। अर्डे पर plagiarism यानी साहित्यिक चोरी सहित कई आरोप सामने आने के बाद उन्होंने हाल ही में विश्वविद्यालय से इस्तीफा दिया। कैम्ब्रिज ने उनके नियुक्ति मामले की स्वतंत्र जांच शुरू करने की घोषणा भी की है।
अहमद और अर्डे दोनों का संबंध कैम्ब्रिज की फैकल्टी ऑफ एजुकेशन से रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने यूनिवर्सिटी में अकादमिक नियुक्तियों की प्रक्रिया और उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि की जांच को लेकर बहस तेज कर दी है। हालांकि, कैम्ब्रिज की फैकल्टी ऑफ एजुकेशन ने कहा है कि वह कानून के दायरे में academic freedom और freedom of speech के लिए प्रतिबद्ध है और उसके सदस्यों को विचारों पर अकादमिक बहस करने का अधिकार है।#CambridgeUniversity #FarahAhmed #HizbUtTahrir #CambridgeNews #UKNews #EducationNews #AcademicFreedom #JasonArday #UniversityNews #IslamicEducation






