उत्तर प्रदेश की राजनीति से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान जेल से बाहर आते ही एक बार फिर कानूनी शिकंजे में फंस गए हैं। रामपुर जेल से रिहाई के कुछ ही मिनट बाद प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अब ईडी आजम खान को गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेश कर रिमांड की मांग करेगी।
दरअसल, आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड रखने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। 29 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत देने का आदेश दिया था। इसके बाद शनिवार, 31 अक्टूबर को करीब 11 महीने बाद दोनों रामपुर जेल से बाहर आए। लेकिन आजम खान की रिहाई ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। जेल के बाहर पहले से मौजूद ईडी की टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया और बाद में गिरफ्तार कर लिया। वहीं, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम अपने घर चले गए।
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अब सवाल है कि आखिर आजम खान को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है? दरअसल, ईडी की यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े कथित धनशोधन मामले में हुई है। जांच एजेंसी विश्वविद्यालय के निर्माण, जमीन, भवनों और ट्रस्ट को मिले धन के स्रोतों की पड़ताल कर रही है।
ईडी की जांच के मुताबिक, विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च और उपलब्ध वैध वित्तीय स्रोतों के बीच अंतर पाया गया है। एजेंसी ने 28 अक्टूबर को विश्वविद्यालय से जुड़ी 426.46 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क भी किया था। इन संपत्तियों में जमीन और भवन शामिल हैं। ईडी का आरोप है कि निर्माण पर खर्च हुई पूरी रकम के वैध स्रोतों का हिसाब नहीं मिल पाया है। हालांकि, ये जांच एजेंसी के आरोप हैं, जिनका अंतिम फैसला अदालत में होना है।
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इस मामले की जांच वर्ष 2019 में दर्ज ईसीआईआर के तहत की जा रही है। ईडी विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल हुए धन, ट्रस्ट के बैंक खातों, चंदे और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। जांच का एक पहलू लोक निर्माण विभाग के ठेकों और सरकारी धन के कथित इस्तेमाल से भी जुड़ा बताया जा रहा है।
अब ईडी आजम खान को गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड मांगेगी। एजेंसी उनसे ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों, विश्वविद्यालय के निर्माण में खर्च हुई रकम और धन के स्रोतों को लेकर पूछताछ करना चाहती है। अदालत तय करेगी कि ईडी को कितने दिनों की हिरासत मिलेगी।
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वहीं, जेल से बाहर आते ही दोबारा गिरफ्तारी पर आजम खान ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह एक मुसलमान होने की सजा है। उनका आरोप था कि एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा विश्वविद्यालय और बच्चों के स्कूल बनाना ही उनका अपराध बना दिया गया है।
इस घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। अब सबकी निगाहें गाजियाबाद कोर्ट की सुनवाई और रिमांड पर आने वाले फैसले पर टिकी हैं।
फिलहाल आजम खान की जेल से रिहाई के तुरंत बाद हुई गिरफ्तारी ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है।
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