महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे को लेकर राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उनके संभावित तबादले को लेकर विधानसभा में गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क और प्रभावशाली कारोबारी समूहों की भूमिका होने का दावा किया गया है।
महाराष्ट्र विधानसभा के दौरान एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग लॉबी ने तुकाराम मुंढे का तबादला सुनिश्चित कराने के लिए कथित तौर पर 250 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।
आव्हाड ने दावा किया कि फूड और फार्मास्युटिकल सेक्टर से जुड़े कुछ प्रभावशाली कारोबारी, मिलावट और अवैध कारोबार पर की जा रही सख्त कार्रवाई से असंतुष्ट हैं। उनके अनुसार, इन समूहों को एफडीए कमिश्नर की सख्त कार्यशैली और कार्रवाई से आर्थिक नुकसान हो रहा है, जिसके चलते उन्हें पद से हटाने की कोशिश की जा रही है।
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि इस कथित नेटवर्क में कुछ भ्रष्ट अधिकारी भी शामिल हैं, जो अवैध कारोबार और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई को कमजोर करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक तबादले का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
जितेंद्र आव्हाड ने विधानसभा में कहा, “मैं अगले सोमवार को सदन में इस पूरे रैकेट से जुड़े बड़े नामों का खुलासा करूंगा।” उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विपक्ष तथा सत्ता पक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस की संभावना बढ़ गई है।
हालांकि, अब तक इन आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। वहीं, सरकार या संबंधित विभाग की ओर से भी इन आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
तुकाराम मुंढे अपनी सख्त प्रशासनिक छवि और नियमों के कड़ाई से पालन के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में उनके संभावित तबादले को लेकर उठे आरोपों ने महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ प्रशासनिक हलकों में भी नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजरें विधानसभा के अगले सत्र पर टिकी हैं, जहां आव्हाड द्वारा किए गए दावों से जुड़े कथित नामों का खुलासा किए जाने की बात कही गई है।








