मध्य प्रदेश के दतिया जिले के भांडेर कस्बे से सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। यहां मुहर्रम के जुलूस के दौरान ताजियों को पारंपरिक रूप से कर्बला की ओर ले जाने से पहले प्रसिद्ध चतुर्भुज कृष्ण मंदिर के सामने रोका गया, जहां भगवान कृष्ण को प्रतीकात्मक रूप से ‘सलामी’ दी गई।
स्थानीय स्तर पर निभाई जाने वाली यह अनूठी परंपरा गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक समरसता की मिसाल मानी जाती है। बताया जाता है कि भांडेर कस्बे में यह परंपरा करीब 200 वर्षों से चली आ रही है और आज भी उसी श्रद्धा और सम्मान के साथ निभाई जाती है।
जानकारी के अनुसार, मुहर्रम के अवसर पर निकलने वाले ताजियों को चतुर्भुज मंदिर के सामने कुछ समय के लिए रोका जाता है और इसके बाद उन्हें कर्बला की ओर रवाना किया जाता है। इस दौरान दोनों समुदायों के लोग एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए इस परंपरा का हिस्सा बनते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रस्म पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और समय के साथ इसकी अहमियत और भी बढ़ी है। उनका मानना है कि यह परंपरा न केवल धार्मिक सौहार्द को मजबूत करती है, बल्कि समाज में एकता, भाईचारे और पारस्परिक सम्मान का संदेश भी देती है।
भांडेर की यह परंपरा ऐसे समय में सामाजिक सद्भाव का सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करती है, जब देश के विभिन्न हिस्सों से अक्सर तनाव और विवाद की खबरें सामने आती रहती हैं। यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि विविधता के बीच भी आपसी सम्मान और विश्वास के आधार पर सामाजिक एकता को मजबूत किया जा सकता है।








