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भारत लौटेंगी 11वीं सदी की ‘अनैमंगलम तांबे की प्लेटें’, पीएम मोदी की नीदरलैंड्स यात्रा में बड़ी सांस्कृतिक सफलता

भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। नीदरलैंड्स ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की यात्रा के दौरान 11वीं सदी की ऐतिहासिक “अनैमंगलम तांबे की प्लेटें” भारत को लौटाने का फैसला किया है। इन दुर्लभ धरोहरों को “लीडेन प्लेट्स” के नाम से भी जाना जाता है और ये पिछले तीन सौ वर्षों से अधिक समय से Leiden University में सुरक्षित रखी गई थीं।

चोल साम्राज्य से जुड़ी ये ऐतिहासिक तांबे की प्लेटें दक्षिण भारत के गौरवशाली इतिहास और उस दौर की वैश्विक सोच का महत्वपूर्ण प्रमाण मानी जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये प्लेटें चोल राजवंश की प्रशासनिक व्यवस्था, धार्मिक दृष्टिकोण और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को समझने में बेहद अहम भूमिका निभाती हैं।

करीब 30 किलोग्राम वजन वाली इन प्लेटों का सेट 21 तांबे की प्लेटों से बना है, जिन्हें एक कांस्य की अंगूठी से जोड़ा गया है। इस अंगूठी पर महान चोल सम्राट Rajendra Chola I की शाही मुहर अंकित है। इन प्लेटों पर संस्कृत और तमिल भाषा में महत्वपूर्ण शिलालेख दर्ज हैं।

इतिहासकारों के मुताबिक, इन अभिलेखों का संबंध सम्राट Rajaraja Chola I और उनके पुत्र राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल से है। संस्कृत में लिखे गए हिस्से में चोल राजवंश की वंशावली का उल्लेख मिलता है, जिसमें शासकों की सत्ता को भगवान विष्णु से जुड़ी दैवीय परंपरा से जोड़ा गया है। वहीं तमिल भाषा में लिखे गए हिस्सों में प्रशासनिक आदेश, भूमि दान और धार्मिक संस्थानों को दिए गए अधिकारों का विवरण दर्ज है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि ये प्लेटें केवल ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं बल्कि चोल साम्राज्य की राजनीतिक शक्ति, समुद्री व्यापार और सांस्कृतिक प्रभाव का प्रतीक भी हैं। चोल साम्राज्य उस समय दक्षिण भारत के सबसे शक्तिशाली समुद्री साम्राज्यों में से एक माना जाता था, जिसका प्रभाव दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैला हुआ था।

भारत सरकार लंबे समय से विदेशों में मौजूद भारतीय सांस्कृतिक धरोहरों को वापस लाने के प्रयास कर रही है। हाल के वर्षों में कई प्राचीन मूर्तियां, कलाकृतियां और ऐतिहासिक वस्तुएं भारत को लौटाई गई हैं। ऐसे में अनैमंगलम तांबे की प्लेटों की वापसी को सांस्कृतिक कूटनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन ऐतिहासिक प्लेटों की भारत वापसी से आने वाली पीढ़ियों को देश के समृद्ध इतिहास और चोल साम्राज्य की विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।

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