‘जब पुलिस ही वसूली करने लगे तो लोग बेबस हो जाते हैं’, SC ने मुंबई के 3 रेलवे पुलिसकर्मियों की जमानत की रद
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अगस्त में मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर नाबालिग के साथ यात्रा कर रहे व्यक्ति से जबरन वसूली और आपराधिक धमकी देने के आरोपी तीन रेलवे पुलिसकर्मियों की अग्रिम जमानत रद कर दी है। इन पुलिसकर्मियों को पिछले साल सितंबर में बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह राहत दी थी।
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने कहा कि जब कानून लागू करने वाले ही जबरन वसूली करने लगें, तो नागरिक असहाय होकर देखता रह जाता है और उसके पास चुपचाप झुकने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता।पुलिसकर्मी के लिए अलग-अलग पैमाने
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को अस्पष्ट बताते हुए उसे खारिज कर दिया। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि अपने पद का दुरुपयोग करने वाले किसी पुलिस अधिकारी के मामले से निपटते समय, “एक आम आरोपी व्यक्ति पर लागू होने वाली सामान्य धारणाएं लागू नहीं होंगी।
क्या था पूरा मामला?
यह घटना पिछले साल अगस्त महीने की है। एक यात्री अपने एक नाबालिग बच्चे के साथ राजस्थान जा रहा था। यात्री ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर उसके पास से 14 ग्राम सोने का बिस्कुट और 31,900 रुपये नकद मिलने के बाद उसे हिरासत में ले लिया था और फिर उससे जबरन वसूली की गई।
इस मामले में पुलिसकर्मियों की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुई हैं। हाल ही में डिपार्टमेंटल इंक्वायरी के बाद राज्य सरकार द्वारा तीनों आरोपी पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।








