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आरा का केसरी परिवार बना मिसाल: 300 से अधिक बार रक्तदान कर बचाई कई जिंदगियां

आरा का केसरी परिवार बना रक्तदान की मिसाल, अब तक 300 से अधिक बार किया रक्तदान

आरा। रक्तदान को महादान कहा जाता है, क्योंकि एक यूनिट रक्त आपातकालीन परिस्थितियों में तीन मरीजों तक की जान बचाने में मददगार साबित हो सकता है। बिहार के आरा शहर का एक परिवार इसी सोच को जीवन का हिस्सा बनाकर समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। जेल रोड स्थित किराना व्यवसायी राजबाबू केसरी और उनका परिवार वर्षों से नियमित रक्तदान कर मानव सेवा का अनूठा उदाहरण पेश कर रहा है।

जिला रेडक्रॉस सोसायटी के रिकॉर्ड के अनुसार, केसरी परिवार अब तक 300 से अधिक बार रक्तदान कर चुका है। परिवार का लगभग हर योग्य सदस्य वर्ष में चार बार रक्तदान करता है और जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है।

पिता की बीमारी बनी प्रेरणा

राजबाबू केसरी बताते हैं कि उन्हें रक्तदान की प्रेरणा अपने पिता के इलाज के दौरान मिली। उनके पिता एक गंभीर बीमारी से पीड़ित थे, जिसके कारण शरीर में छोटे-छोटे घाव बन जाते थे और उन्हें बार-बार रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती थी।

इलाज के दौरान परिवार को रक्त की व्यवस्था करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उस दौर में रक्तदान को लेकर लोगों में जागरूकता बहुत कम थी और कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई थीं। जरूरत पड़ने पर भी लोग रक्त देने के लिए आसानी से तैयार नहीं होते थे।

2005-06 में थी जागरूकता की कमी

राजबाबू बताते हैं कि वर्ष 2005-06 के दौरान रक्तदान के प्रति लोगों का नजरिया आज की तुलना में काफी अलग था। अधिकांश लोग यह मानते थे कि रक्तदान करने से शरीर कमजोर हो जाता है या स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है। इन गलत धारणाओं के कारण जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त मिलना कठिन हो जाता था।

अपने पिता की पीड़ा और रक्त की कमी से होने वाली परेशानियों को करीब से देखने के बाद परिवार ने संकल्प लिया कि वे स्वयं नियमित रक्तदान करेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।

सेवा को बनाया जीवन का हिस्सा

समय के साथ रक्तदान केसरी परिवार के लिए केवल सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि सेवा और जिम्मेदारी का प्रतीक बन गया। परिवार के सदस्य नियमित रूप से रक्तदान शिविरों में भाग लेते हैं और जरूरत पड़ने पर सीधे अस्पतालों तथा रक्त बैंकों के माध्यम से भी सहायता करते हैं।

उनका मानना है कि रक्तदान से किसी का जीवन बचाया जा सकता है और इससे बड़ा मानव सेवा का कार्य शायद ही कोई हो।

समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण

आज केसरी परिवार न केवल आरा बल्कि पूरे बिहार में रक्तदान जागरूकता का प्रतीक बन चुका है। परिवार की इस पहल ने अनेक युवाओं को भी रक्तदान के लिए प्रेरित किया है। सामाजिक संगठनों और स्वास्थ्य संस्थाओं द्वारा भी समय-समय पर परिवार के सदस्यों को सम्मानित किया जाता रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार नियमित और स्वैच्छिक रक्तदान से रक्त बैंकों में पर्याप्त भंडार बनाए रखने में मदद मिलती है, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सकता है।

केसरी परिवार की कहानी यह साबित करती है कि व्यक्तिगत अनुभव से शुरू हुई एक छोटी पहल समाज में बड़ा बदलाव ला सकती है और अनगिनत लोगों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगा सकती है।

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