शिक्षा विभाग ने ई-शिक्षा कोष (e-Shiksha Kosh) में दर्ज शिक्षक प्रोफाइल की जानकारी में अनधिकृत बदलाव को लेकर सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि टीचर प्रोफाइल में स्थायी पता (Permanent Address) या पत्राचार पता (Correspondence Address) बदलने वाले शिक्षकों की जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार शिक्षक की नियुक्ति (बहाली) के समय जो स्थायी पता रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है, उसे किसी भी परिस्थिति में परिवर्तित नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा पत्राचार पते में भी किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इस तरह के बदलावों से शिक्षक की वास्तविक पहचान और सेवा संबंधी रिकॉर्ड प्रभावित हो सकते हैं।
शिक्षा विभाग ने कहा है कि बिना अनुमति या उचित कारण के प्रोफाइल में बदलाव करने से संबंधित शिक्षक की पहचान छिपाने या तथ्यों को बदलने की आशंका पैदा हो सकती है। इसी वजह से ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग पिछले एक महीने से राज्यभर के शिक्षकों की टीचर प्रोफाइल को अपडेट और सत्यापित करने की प्रक्रिया चला रहा है। इस अभियान का उद्देश्य शिक्षकों के सेवा अभिलेखों को डिजिटल रूप से सटीक और पारदर्शी बनाना है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि प्रोफाइल अपडेट करने का कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
जानकारी के मुताबिक कई जिलों में अब भी बड़ी संख्या में शिक्षकों की प्रोफाइल अधूरी है या उनमें तकनीकी एवं दस्तावेज संबंधी त्रुटियां मौजूद हैं। ऐसे में विभाग ने संबंधित अधिकारियों और शिक्षकों को समयबद्ध तरीके से प्रोफाइल अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि टीचर प्रोफाइल में दर्ज सभी जानकारियां नियुक्ति संबंधी मूल अभिलेखों के अनुरूप होनी चाहिए। यदि किसी शिक्षक द्वारा जानबूझकर गलत जानकारी दर्ज करने या रिकॉर्ड में बदलाव करने की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
विभागीय स्तर पर अब ऐसे मामलों की निगरानी बढ़ा दी गई है और सभी जिलों को निर्देश दिया गया है कि ई-शिक्षा कोष में उपलब्ध आंकड़ों का सत्यापन कर किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।








