भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ अपनी सख्त और स्पष्ट नीति को दोहराते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होकर इस चुनौती का मुकाबला करने का आह्वान किया है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथानेनी ने कहा कि आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है और इसे किसी भी परिस्थिति, विचारधारा या कारण के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने दुनिया के देशों से आतंकवाद की विचारधारा और उसके नेटवर्क को जड़ से समाप्त करने के लिए सामूहिक और समन्वित प्रयास करने की अपील की। भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक सहयोग और एकजुटता बेहद आवश्यक है।
भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर किसी भी प्रकार के दोहरे मापदंडों का विरोध करते हुए कहा कि दुनिया को इस मामले में एक समान और निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाना होगा। भारत का कहना है कि आतंकवाद को ‘अच्छे’ और ‘बुरे’ की श्रेणियों में विभाजित नहीं किया जा सकता, क्योंकि आतंकवाद का हर स्वरूप मानवता के लिए खतरा है।
भारत ने यह भी जोर दिया कि आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने, वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने या सुरक्षित ठिकाने प्रदान करने वाले तत्वों और देशों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
आतंकवाद के खिलाफ भारत की यह स्पष्ट और सख्त नीति लंबे समय से उसकी विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है, जिसे एक बार फिर वैश्विक मंच पर मजबूती से रखा गया।
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