भविष्य की परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिए महासागरों को यूरेनियम के विशाल स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिशों के बीच चीन के वैज्ञानिकों ने बड़ी उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी शोधकर्ताओं ने ऐसा नया मटीरियल विकसित किया है, जो समुद्री पानी से यूरेनियम निकालने में अमेरिकी ऊर्जा विभाग के निर्धारित लक्ष्य की तुलना में करीब आठ गुना अधिक तेजी से काम करता है।
वैज्ञानिकों की इस तकनीक को उन देशों के लिए अहम माना जा रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं। यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर व्यावहारिक रूप दिया जाता है, तो भविष्य में परमाणु ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
क्या है यूरेनियम सोखने वाला नया मटीरियल?
चिंगदाओ स्थित Chinese Academy of Sciences की एक शोध टीम ने प्राकृतिक समुद्री पानी के नमूनों के साथ इस नए मटीरियल का परीक्षण किया। प्रयोग के दौरान वैज्ञानिकों ने प्रति ग्राम मटीरियल से 50.4 मिलीग्राम तक यूरेनियम निकालने में सफलता हासिल की।
यह आंकड़ा अमेरिका द्वारा तय किए गए 6 मिलीग्राम प्रति ग्राम के पिछले बेंचमार्क से काफी अधिक है। शोधकर्ताओं के परिणाम के मुताबिक, नया मटीरियल समुद्री पानी में मौजूद बेहद कम मात्रा वाले यूरेनियम को प्रभावी ढंग से सोखने में सक्षम है।
समुद्र के पानी में यूरेनियम की मात्रा बेहद कम होने के कारण इसे निकालना लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे में अधिक क्षमता वाले इस मटीरियल का विकास समुद्री जल से यूरेनियम प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





