सुप्रीम कोर्ट की सात जजों वाली संविधान पीठ के सामने विधायी विशेषाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े 23 साल पुराने मामले की सुनवाई हो रही है। यह मामला संसद और विधानसभाओं के सदस्यों को मिले विशेषाधिकारों तथा उनके इस्तेमाल की सीमाओं से संबंधित है।
इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या विधायकों को सदन के भीतर या उससे जुड़े मामलों में प्राप्त विशेषाधिकार अभिव्यक्ति की आजादी और अन्य मौलिक अधिकारों पर प्रभाव डाल सकते हैं। सात सदस्यीय संविधान पीठ इस पूरे संवैधानिक विवाद की बारीकी से समीक्षा कर रही है।
मामला वर्ष 2003 से जुड़ा है और इसके फैसले का असर विधायी विशेषाधिकारों की संवैधानिक सीमा तय करने पर पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट की यह पीठ यह भी स्पष्ट कर सकती है कि जनप्रतिनिधियों को मिले विशेषाधिकारों और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन किस तरह कायम किया जाए।
इस सुनवाई पर इसलिए भी नजरें टिकी हैं, क्योंकि संविधान पीठ का फैसला भविष्य में संसद और राज्य विधानसभाओं के विशेषाधिकारों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी आधार बन सकता है। #SupremeCourt #ConstitutionBench #LegislativePrivilege #FreedomOfSpeech #SupremeCourtHearing #ConstitutionalRights #IndiaNews






