मुंबई के मेडिकल क्षेत्र से एक बड़ी और आधुनिक तकनीकी पहल सामने आई है। अब पोस्टमार्टम के लिए शव को चीरने-फाड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मुंबई के प्रतिष्ठित केईएम अस्पताल में जल्द ही हाईटेक वर्चुअल ऑटोप्सी शुरू होने जा रही है। इस तकनीक की मदद से बिना पारंपरिक चीर-फाड़ के महज 10 मिनट में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
वर्चुअल ऑटोप्सी चिकित्सा क्षेत्र की एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें शव की आंतरिक स्थिति का पता लगाने के लिए अत्याधुनिक इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें आमतौर पर सीटी स्कैन और अन्य डिजिटल इमेजिंग उपकरणों की मदद से शरीर के अंदरूनी अंगों की जांच की जाती है। इससे शरीर को खोले बिना ही कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की जा सकती हैं।
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पारंपरिक पोस्टमार्टम की तरह शरीर पर चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे शव की गरिमा बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही, परिजनों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं का भी ध्यान रखा जा सकेगा।
वर्चुअल ऑटोप्सी से शरीर के अंदर मौजूद चोट, हड्डियों में फ्रैक्चर, रक्तस्राव और अन्य संभावित असामान्यताओं का पता लगाने में मदद मिल सकती है। दुर्घटना, संदिग्ध मौत और आपराधिक मामलों की जांच में भी यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।
केईएम अस्पताल में इस सुविधा की शुरुआत से मुंबई में फॉरेंसिक जांच के क्षेत्र को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। जांच प्रक्रिया अधिक आधुनिक, तकनीक आधारित और सुविधाजनक हो सकती है। हालांकि, हर मामले में वर्चुअल ऑटोप्सी पारंपरिक पोस्टमार्टम का विकल्प नहीं होगी। कुछ मामलों में विस्तृत जांच के लिए पारंपरिक प्रक्रिया की जरूरत बनी रह सकती है।
कुल मिलाकर, मुंबई के केईएम अस्पताल में शुरू होने जा रही यह हाईटेक सुविधा मेडिकल साइंस और फॉरेंसिक जांच के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि यह तकनीक प्रभावी साबित होती है, तो भविष्य में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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