एअर इंडिया ने अपने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के नेटवर्क में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी यूरोप और अमेरिका जाने वाली अपनी अधिकतर उड़ानों का संचालन दिल्ली के बजाय मुंबई से करने पर विचार कर रही है। इसके पीछे पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होना एक बड़ी वजह बताया जा रहा है। इस प्रतिबंध के कारण भारत से पश्चिमी देशों की ओर जाने वाली उड़ानों को लंबे रास्तों से गुजरना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और परिचालन लागत बढ़ रही है।
एअर इंडिया के नए CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर तिवोल्डे गेब्रेमेरियम ने 3 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित Aviation India and South Asia 2026 सम्मेलन में इस रणनीति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध का असर कंपनी के यूरोप और अमेरिका के नेटवर्क पर ज्यादा पड़ा है। ऐसे में एयरलाइन अपने हब नेटवर्क को नए सिरे से व्यवस्थित कर रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली से यूरोप और अमेरिका की उड़ानें पूरी तरह बंद नहीं होंगी, बल्कि इन क्षेत्रों के लिए उड़ानों का बड़ा हिस्सा मुंबई स्थानांतरित किया जाएगा।
दिल्ली और मुंबई के लिए क्या होगी नई रणनीति?
एअर इंडिया की योजना के मुताबिक, दिल्ली को पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के लिए प्रमुख हब के रूप में विकसित किया जाएगा। जापान, चीन और हांगकांग जैसे देशों के लिए कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर रहेगा। वहीं यूरोप और अमेरिका के लिए मुंबई से उड़ानों की संख्या और क्षमता बढ़ाई जाएगी।
कंपनी के CEO ने यह भी बताया कि एअर इंडिया बेंगलुरु को तीसरे अंतरराष्ट्रीय हब के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाश रही है। यानी भविष्य में दिल्ली और मुंबई के अलावा बेंगलुरु भी अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
पाकिस्तान का एयरस्पेस बना बड़ी चुनौती
दरअसल, अप्रैल 2025 से पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर रखा है। इसके चलते एअर इंडिया की यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली कई उड़ानों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।
इसका सीधा असर विमान के ईंधन खर्च, उड़ान के समय और कंपनी की कमाई पर पड़ रहा है। एयरलाइन पहले ही शिकागो और वॉशिंगटन जैसे अमेरिकी शहरों के लिए कुछ सेवाओं में कटौती कर चुकी है। यूरोप के कई शहरों के लिए भी उड़ानों की संख्या घटाई गई है।
आर्थिक स्थिति सुधारने पर भी जोर
एअर इंडिया के सामने केवल परिचालन संबंधी चुनौतियां ही नहीं, बल्कि वित्तीय प्रदर्शन सुधारने की भी बड़ी चुनौती है। कंपनी अब विमान और कर्मचारियों के बेहतर इस्तेमाल, परिचालन लागत में कमी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी वापस हासिल करने पर काम कर रही है।
हालांकि, मुंबई एयरपोर्ट पर सीमित स्लॉट और टर्मिनल से जुड़ी क्षमता की चुनौतियां इस योजना के क्रियान्वयन को प्रभावित कर सकती हैं।
कुल मिलाकर, एअर इंडिया की यह नई रणनीति अंतरराष्ट्रीय विमानन नेटवर्क में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। अब देखना होगा कि मुंबई को यूरोप और अमेरिका की उड़ानों का बड़ा केंद्र बनाने की योजना कब तक जमीन पर उतरती है।
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