जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) में अंदरूनी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। हालिया मंत्रिमंडल विस्तार से नाराज पार्टी विधायकों ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के साथ बैठक कर अपनी मांगें दोहराईं। विधायकों ने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत बनाने, मंत्रिमंडल में व्याक फेरबदल करने और सरकार के कामकाज में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया है। उन्होंने अपनी मांगों और शिकायतों का विस्तृत मांगपत्र भी पार्टी नेतृत्व को सौंपा है।
सूत्रों के अनुसार, विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के सामने स्पष्ट किया है कि उनकी नाराजगी केवल मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी और सरकार के कामकाज में निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनदेखी भी इसका एक प्रमुख कारण है। उन्होंने संगठनात्मक फैसलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और आंतरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग की है।
इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने और अनुच्छेद 370 के तहत मिले विशेष दर्जे की बहाली के लिए पार्टी के चुनावी वादों को लेकर भी नेतृत्व से जवाबदेही की मांग की गई है। विधायकों का मानना है कि इन मुद्दों पर पार्टी को अधिक सक्रिय राजनीतिक और संगठनात्मक पहल करनी चाहिए।
आगा रुहुल्लाह के इस्तीफे के बीच नेतृत्व के सामने नई चुनौती
नेकां में मौजूदा असंतोष ऐसे समय सामने आया है, जब श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने तीन नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफे का एलान कर पार्टी नेतृत्व को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे और अनुच्छेद 370 की बहाली को लेकर किए गए चुनावी वादों पर अपेक्षित कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया था।
रुहुल्लाह और पार्टी नेतृत्व के बीच पिछले काफी समय से मतभेद चल रहे थे। आरक्षण नीति, अनुच्छेद 370 और पार्टी की राजनीतिक कार्यशैली को लेकर उनकी असहमति पहले भी सार्वजनिक हो चुकी थी। उनके इस्तीफे के बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर विधायकों की सामूहिक नाराजगी ने पार्टी नेतृत्व के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की चुनौती और बढ़ा दी है।
रुहुल्लाह का पार्टी और संसद दोनों से अलग होने का फैसला ऐसे समय आया है, जब पार्टी के भीतर विभिन्न स्तरों पर नेतृत्व की कार्यशैली और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में इन दोनों घटनाक्रमों को पार्टी के भीतर असंतोष के अलग-अलग लेकिन महत्वपूर्ण संकेतों के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, नाराज विधायकों की मांगें और रुहुल्लाह के इस्तीफे के पीछे की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन दोनों घटनाओं ने पार्टी नेतृत्व के सामने संवाद, जवाबदेही और संगठनात्मक सुधार का मुद्दा प्रमुखता से ला दिया है।






