Baddi के औद्योगिक क्षेत्र में फूड लाइसेंस की आड़ में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस और ड्रग विभाग की संयुक्त कार्रवाई में टोडोल नाम से बनाई जा रही लाखों नशीली गोलियों का नेटवर्क सामने आया है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, सिरमौर की एक कंपनी के नाम और फर्जी बैच नंबर का इस्तेमाल कर बद्दी में नशीली दवाएं तैयार की जा रही थीं। इन दवाओं को कुरियर के जरिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली समेत कई राज्यों में भेजा जाता था।
पुलिस और ड्रग विभाग ने 8 मई को छापेमारी के दौरान 2.23 लाख से अधिक नशीली गोलियां बरामद की थीं। इसके बाद शुरू हुई जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
हेल्थ सप्लीमेंट की आड़ में चल रहा था कारोबार
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि दूसरे राज्यों के उद्योगपतियों ने बद्दी फार्मा हब में हेल्थ सप्लीमेंट और न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद बनाने के नाम पर बड़ा नेटवर्क खड़ा कर रखा था। लाइसेंस का इस्तेमाल वैध उत्पादों के लिए दिखाया जा रहा था, जबकि अंदरखाने प्रतिबंधित दवाओं का निर्माण और सप्लाई जारी थी।
इन कंपनियों के नाम आए सामने
जांच के दौरान एएस केमिकल और जैना विजन नामक उद्योगों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि न्यूट्रास्यूटिकल उत्पादों के लाइसेंस की आड़ में ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी प्रतिबंधित दवाओं का अवैध निर्माण और कारोबार किया जा रहा था।
कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं था। तैयार की गई नशीली गोलियां कुरियर सेवाओं के माध्यम से कई राज्यों में भेजी जा रही थीं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और सप्लाई चेन की जांच में जुटी है।
ड्रग विभाग और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बद्दी फार्मा हब में संचालित अन्य यूनिट्स की
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