अमेरिका लौटने वाले ग्रीन कार्ड धारकों के लिए बदले नियम, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ सकती है मुश्किलें
अमेरिका में स्थायी निवास का अधिकार रखने वाले कई ग्रीन कार्ड धारकों के लिए भारत या किसी अन्य देश की सामान्य यात्रा भी अब अप्रत्याशित कानूनी और इमिग्रेशन चुनौतियां पैदा कर सकती है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने विशेष रूप से उन वैध स्थायी निवासियों (Lawful Permanent Residents) की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जो किसी आपराधिक मामले या आरोप का सामना कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि विदेश यात्रा के बाद अमेरिका लौट रहे कुछ ग्रीन कार्ड धारकों को सीमा पर स्वतः प्रवेश का अधिकार नहीं माना जाएगा। इसके बजाय, अमेरिकी सीमा अधिकारी उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में देख सकते हैं जो अमेरिका में प्रवेश पाने का अनुरोध कर रहा है और जिसके प्रवेश को लेकर अलग से निर्णय लिया जाना है।
इस फैसले का सीधा असर उन ग्रीन कार्ड धारकों पर पड़ सकता है जिनके खिलाफ किसी प्रकार के आपराधिक आरोप लंबित हैं या जिनका नाम किसी आपराधिक जांच में शामिल है। ऐसे मामलों में अमेरिका लौटने पर उन्हें पहले की तुलना में अधिक कड़ी जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।
यह फैसला ब्लांच बनाम लाउ (Blanche v. Lau) मामले में 6-3 के बहुमत से सुनाया गया। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय ने अमेरिकी सीमा सुरक्षा एजेंसी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) के अधिकारियों को व्यापक अधिकार प्रदान किए हैं। अब सीमा पर मौजूद अधिकारी यह तय कर सकेंगे कि संबंधित ग्रीन कार्ड धारक को तत्काल प्रवेश दिया जाए या उसे औपचारिक रूप से “प्रवेश चाहने वाले व्यक्ति” के रूप में माना जाए।
पहले सामान्य परिस्थितियों में वैध ग्रीन कार्ड धारकों को विदेश यात्रा के बाद अमेरिका में दोबारा प्रवेश का अधिकार लगभग स्वतः प्राप्त माना जाता था। हालांकि, नए फैसले के बाद यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक आरोप हैं या उसकी पृष्ठभूमि इमिग्रेशन कानून के तहत संदेह पैदा करती है, तो सीमा अधिकारियों के पास उसके प्रवेश पर सवाल उठाने का अधिकार होगा।
#USSupremeCourt #GreenCard #USImmigration #America #ImmigrationRules #USVisa #GreenCardHolder #CBP #USBorder #Deportation #TravelNews #IndianInAmerica








