नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। इस आपदा के बाद तिब्बत क्षेत्र में मौजूद कई तीर्थयात्रियों के लापता होने की खबर है। इनमें बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की बताई जा रही है, जो कैलास मानसरोवर की धार्मिक यात्रा पर गए थे।
आपदा के करीब 10 दिन बाद भी 261 विदेशी नागरिकों का कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। चीन की ओर से लापता तीर्थयात्रियों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आने के कारण उनके परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
लापता तीर्थयात्रियों के परिजनों का आरोप है कि चीन का विदेश मंत्रालय इस संबंध में नियमित और स्पष्ट जानकारी साझा नहीं कर रहा है। परिवारों का कहना है कि एक ओर चीन की ओर से पारदर्शी और समयबद्ध सूचना उपलब्ध कराने की बात कही जाती है, लेकिन दूसरी तरफ उन्हें अपने परिजनों की स्थिति के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही।
इस स्थिति ने लापता लोगों के परिवारों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। परिजनों का कहना है कि वे खुद चीन जाकर अपने स्तर पर तलाश या जानकारी जुटाने की स्थिति में भी नहीं हैं।
इन लापता तीर्थयात्रियों में फिनलैंड में रहने वाली भारतीय मूल की प्रियंका चौधरी भी शामिल हैं। उनके भाई तरुण ने बताया कि चीन की ओर से परिवार को अब तक कोई जानकारी नहीं दी गई है।
तरुण के मुताबिक, परिवार के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि वे चीन जाकर अधिकारियों या संबंधित लोगों से सीधे संपर्क नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि स्थिति लगातार अनिश्चित बनी हुई है और परिवार को समझ नहीं आ रहा कि इस वक्त क्या कदम उठाया जाए।
कैलास मानसरोवर यात्रा पर गए लोगों के लापता होने के इस मामले ने उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर चीन की ओर से मिलने वाली आधिकारिक जानकारी और लापता तीर्थयात्रियों की तलाश के प्रयासों पर है।






