Mamata Banerjee की पार्टी All India Trinamool Congress यानी टीएमसी के भीतर इन दिनों अंदरूनी कलह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी के करीब 50 विधायक नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों से नाराज बताए जा रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी विधायक ने खुलकर बगावत का ऐलान नहीं किया है, लेकिन इन चर्चाओं ने बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।
सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी के कई नेता संगठन में फैसले लेने के तरीके, स्थानीय नेतृत्व और टिकट वितरण जैसे मुद्दों को लेकर असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। पार्टी के भीतर बढ़ती खींचतान को लेकर विपक्ष भी लगातार हमलावर है। बीजेपी नेताओं का दावा है कि टीएमसी के अंदर असंतोष चरम पर पहुंच चुका है और आने वाले समय में कई बड़े चेहरे पार्टी छोड़ सकते हैं।
हालांकि टीएमसी नेतृत्व इन दावों को पूरी तरह खारिज कर रहा है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर अफवाहें फैलाकर पार्टी की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है। टीएमसी नेताओं ने कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सरकार स्थिर है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में लगातार बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और आगामी चुनावों को देखते हुए टीएमसी के भीतर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। पार्टी के कई नेता क्षेत्रीय स्तर पर अपनी भूमिका और प्रभाव को लेकर भी असंतुष्ट हो सकते हैं। ऐसे में नेतृत्व के सामने संगठन को एकजुट बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।
गौरतलब है कि हाल के महीनों में Bharatiya Janata Party और अन्य विपक्षी दल लगातार टीएमसी सरकार को भ्रष्टाचार, प्रशासनिक फैसलों और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर घेरते रहे हैं। वहीं टीएमसी नेतृत्व विपक्ष पर राजनीतिक साजिश का आरोप लगाता रहा है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह असंतोष केवल राजनीतिक अटकलों तक सीमित रहेगा या आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में कोई बड़ा घटनाक्रम देखने को मिलेगा।








