केरलम में गिल्ट से भरे कबूलनामे ने पुलिस को भी हैरान कर दिया है। इस खुलासे ने चार दशक पुरानी मर्डर मिस्ट्री की गुत्थी को सुलझाने में मदद की है, जिससे जांचकर्ता उस युवक की पहचान कर सके हैं जिसके शव को 1986 में एक नाले में मिलने के बाद अज्ञात मानकर दफना दिया गया था।
कोझिकोड के पहाड़ी इलाके तिरुवमबडी की पुलिस ने बताया कि पीड़ित की पहचान कन्नूर जिले के इरित्ती निवासी 22 वर्षीय मोहनन के रूप में हुई है। यह पहचान 56 वर्षीय मुहम्मदअली उर्फ एंटनी के पुलिस स्टेशन में आकर हत्या का गुनाह कबूलने के साल बाद हुई है।4 जून, 2025 को मलप्पुरम जिले के निवासी मुहम्मदअली ने वेंगारा पुलिस स्टेशन में जाकर अधिकारियों को बताया था कि उसने नवंबर 1986 में व्यक्ति की हत्या कर दी थी, जब वह खुद किशोर था।
बेटे की मौत पर आत्मग्लानि ने किया बेचैन
पुलिस के अनुसार, मुहम्मदअली ने बताया कि हाल ही में उसके बड़े बेटे की मौत और दूसरे बच्चे के साथ हुई दुर्घटना के बाद उसका अपराधबोध असहनीय हो गया था। उसने पुलिस को बताया कि वह दशकों तक नींद न आना और पश्चाताप की आग में जलता रहा।मुहम्मदअली ने कथित तौर पर बताया कि वह एक संपत्ति पर खेत मजदूर के रूप में काम कर रहा था, तभी वहां एक विवाद हो गया। उसने दावा किया कि एक व्यक्ति ने उस पर हमला करने की कोशिश की, जिसके बाद उसने आत्मरक्षा में उसे लात मार दी। वह व्यक्ति एक नाले में गिर गया और मुहम्मदअली वहां से भाग गया।
इस कबूलनामे के बाद पुलिस ने उस पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया। उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था और फिलहाल वह जमानत पर बाहर है। पुलिस ने कहा कि मामले में जल्द ही चार्जशीट दायर की जाएगी।
पुलिस के स्केच से सामने आई मृतक की पहचान
मामला फिर से खुलने के बाद, जांचकर्ता मुहम्मदअली को करिणकुट्टी ले गए, जहां उसने वह नाला दिखाया। पुलिस ने उसके द्वारा दिए गए विवरण के आधार पर मृतक का एक स्केच तैयार किया और पूरे उत्तरी केरलम में पूछताछ शुरू की।
इस मामले में बड़ी सफलता तब मिली जब मोहनन के रिश्तेदारों ने जांचकर्ताओं से संपर्क किया और बताया कि स्केच उनके परिवार के एक सदस्य से मिलता-जुलता है, जो 1980 के दशक के मध्य में लापता हो गया था।
काम की तलाश में घर से निकला था मोहनन
पुलिस ने बताया कि मोहनन काम की तलाश में घर से निकला था और उसके परिवार को कूडारनही से भेजा गया उसका एक पत्र भी मिला था। बाद में परिजनों ने मूल जांच के दौरान ली गई तस्वीरों की जांच की और शव की पहचान की।
जांचकर्ताओं ने बताया कि शुरुआत में इस मौत को डूबने का मामला मानकर जांच की गई थी और इसमें साजिश के कोई संकेत नहीं मिले थे। कोई दावेदार सामने न आने के बाद अज्ञात शव को सार्वजनिक कब्रिस्तान में दफना दिया गया था।
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