बिहार की राजधानी पटना में कोचिंग संस्थानों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। चर्चित शिक्षण संस्थान खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी से जुड़े घटनाक्रम ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राज्य की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है। पथराव, फायरिंग और उसके बाद ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी संचालक रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
मामले की जांच फिलहाल पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के स्तर पर जारी है, लेकिन विपक्ष ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
तेजस्वी यादव ने उठाई CBI जांच की मांग
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने मुख्यमंत्री Samrat Choudhary को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग की है। अपने पत्र में तेजस्वी यादव ने कहा कि प्रिंस यादव की मौत और उससे पहले हुई हिंसक घटनाओं की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो।
उन्होंने यह भी कहा कि मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बन चुका है और इसे लेकर छात्रों व आम लोगों के बीच कई तरह की आशंकाएं पैदा हो रही हैं। ऐसे में स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराए जाने से लोगों का भरोसा मजबूत होगा।
कोचिंग संस्थानों के विवाद से बढ़ा तनाव
पटना में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले बड़े कोचिंग संस्थानों के बीच प्रतिस्पर्धा लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। हाल के दिनों में खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी से जुड़े विवाद ने तब गंभीर रूप ले लिया जब दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच तनाव, पथराव और फायरिंग जैसी घटनाओं की खबरें सामने आईं।
इन घटनाओं के बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। इसी बीच रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर ने पूरे प्रकरण को नया मोड़ दे दिया। पुलिस इस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
सरकार ने विपक्ष के आरोपों को किया खारिज
वहीं बिहार सरकार के मंत्री Ram Kripal Yadav ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मामले की जांच कानून के अनुसार की जा रही है। उन्होंने विपक्ष पर इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया।
मीडिया से बातचीत में रामकृपाल यादव ने कहा कि किसी भी जांच को प्रभावित करने या उसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले में पुलिस की जांच जारी है और कई पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ाई जा रही है। वहीं, विपक्ष की CBI जांच की मांग के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बन गया है।
आने वाले दिनों में सरकार के रुख, पुलिस जांच की प्रगति और अदालत में होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। यदि CBI जांच की मांग को लेकर दबाव बढ़ता है तो यह मामला बिहार की राजनीति में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।








