वॉशिंगटन: अमेरिकी सीनेट ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से एक अहम प्रतिबंध विधेयक (Sanctions Bill) को मंजूरी दे दी है। इस बिल के पारित होने के बाद भारत सहित पांच देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने की संभावना बढ़ गई है। यह कदम रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को पर आर्थिक दबाव बनाने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
सीनेट में हुई वोटिंग के दौरान इस विधेयक को 86 सांसदों का समर्थन मिला, जबकि 12 सदस्यों ने इसके विरोध में मतदान किया। अब इस विधेयक पर आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसके लागू होने की दिशा तय होगी।
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर असर पड़ सकता है
सीनेट से पारित इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य रूस के ऊर्जा कारोबार को सीमित करना है। प्रस्ताव के अनुसार, रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है।
इस दायरे में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देश शामिल बताए गए हैं, जो रूस से ऊर्जा आयात करते हैं। यदि यह प्रावधान लागू होता है, तो इन देशों के साथ अमेरिकी व्यापारिक संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।
लिंडसे ग्राहम ने तैयार किया था विधेयक
रूस पर प्रतिबंधों से संबंधित इस विधेयक का मसौदा दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तैयार किया था। मंगलवार को अमेरिकी सीनेट में यह विधेयक उस समय पेश किया गया, जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की अमेरिकी संसद भवन के दौरे पर मौजूद थे।
रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति
अमेरिका का मानना है कि रूस के ऊर्जा निर्यात से होने वाली आय उसके युद्ध प्रयासों को आर्थिक समर्थन देती है। ऐसे में यह विधेयक उन देशों पर भी आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश करता है, जो रूस से तेल खरीदना जारी रखे हुए हैं।
इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर देशों को रूस के साथ ऊर्जा व्यापार सीमित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
पहले भी पेश किया गया था प्रस्ताव
यह विधेयक पहली बार अप्रैल 2025 में पेश किया गया था। उस समय लिंडसे ग्राहम ने कहा था कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक मतभेदों के बावजूद तत्कालीन राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को समर्थन दिया था।
हालांकि, इस विधेयक के अंतिम प्रभाव और इसके लागू होने की प्रक्रिया आगे की संवैधानिक और प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
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