चीन में कभी मिलिट्री-स्टाइल अनुशासन और शारीरिक दंड के लिए बदनाम रहे कई संस्थानों ने अब अपना तौर-तरीका और पहचान बदल ली है। लोगों के बढ़ते विरोध के बाद इन संस्थानों ने खुद को ‘फैमिली एजुकेशन सेंटर’, ‘बिहेवियरल इंटरवेंशन प्रोग्राम’ और ‘यूथ डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन’ जैसे नामों से पेश करना शुरू कर दिया।
हालांकि, एक रिपोर्ट के मुताबिक, नाम और पहचान बदलने के बावजूद इन संस्थानों का कामकाज पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब इनका बिजनेस मॉडल बच्चों और किशोरों से आगे बढ़कर ऐसे वयस्कों तक भी पहुंच रहा है, जिनकी निजी पसंद या जीवनशैली उनके माता-पिता की अपेक्षाओं से अलग है।
कैसे काम कर रहे हैं ये संस्थान?
ऑनलाइन मैगजीन द डिप्लोमैट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन संस्थानों में हस्तक्षेप के लिए कई तरह की व्यक्तिगत आदतों और जीवनशैली को आधार बनाया जा सकता है। इनमें रोमांटिक रिलेशनशिप में होना, जरूरत से ज्यादा वीडियो गेम खेलना, बेरोजगार रहना, पारंपरिक रास्ते से अलग करियर चुनना और सोने का अनियमित शेड्यूल शामिल हैं।
यानी, जिन वयस्कों की पसंद, करियर या जीवनशैली उनके परिवार की सोच से मेल नहीं खाती, उन्हें भी अब ऐसे संस्थानों के ‘बिहेवियर करेक्शन’ मॉडल के दायरे में लाया जा सकता है।
विशेषज्ञों और रिपोर्टों के मुताबिक, यह बदलाव इस बात की ओर इशारा करता है कि चीन में इस तरह के संस्थानों ने बदलते सामाजिक माहौल के साथ अपने नाम और काम करने के तरीके में बदलाव तो किया है, लेकिन परिवारों की अपेक्षाओं के अनुरूप लोगों के व्यवहार को बदलने का मूल मॉडल कई जगहों पर अब भी कायम है।#China #ChinaNews #BehaviorCorrection #FamilyEducation #YouthDevelopment #ChinaSociety #TheDiplomat #ViralNews #InternationalNews #WorldNews #TrendingNews






