एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ बम धमाके की जांच को लेकर नया विवाद सामने आया है। 1985 में हुए इस आतंकी हमले की जांच को 41 साल बाद कम किए जाने और मामले को ‘इनएक्टिव’ यानी निष्क्रिय स्थिति में डाले जाने की संभावित योजना की खबर सामने आई है। पीड़ित परिवारों ने इस संभावित कदम का विरोध करते हुए जांच जारी रखने की मांग की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से इस महीने पीड़ित परिवारों के साथ एक बैठक की गई थी। इसमें कथित तौर पर एयर इंडिया टास्क फोर्स में कटौती और जांच को निष्क्रिय स्थिति में डालने की संभावना के बारे में परिवारों को जानकारी दी गई। हालांकि, एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार RCMP ने इस स्थिति की सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की है।
पीड़ित परिवारों ने किया विरोध
कनिष्क फाउंडेशन के चेयरमैन और पीड़ित परिवार के सदस्य संजय लाजर ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को पत्र लिखकर जांच को बंद या निष्क्रिय करने की किसी भी संभावित कार्रवाई का विरोध किया है। लाजर ने बताया कि उन्होंने इस हादसे में अपने माता-पिता और छोटी बहन को खोया था और परिवार पिछले चार दशकों से न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं।
परिवारों की ओर से जांच में कथित तौर पर सामने आई पुरानी कमियों, सबूतों के गायब होने और गवाहों से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया है। उनका कहना है कि मामले से जुड़े सभी उचित जांच विकल्पों को पूरी तरह आजमाए बिना जांच को निष्क्रिय नहीं किया जाना चाहिए। इन दावों को परिवारों के पक्ष के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि जांच या अदालतों के स्थापित निष्कर्ष के रूप में।
1985 में हुआ था कनिष्क विमान धमाका
एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ 23 जून 1985 को मॉन्ट्रियल से लंदन जा रही थी। आयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर विमान में बम धमाका हुआ था। इस घटना में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में 268 कनाडाई नागरिक भी शामिल थे। कनाडा के अधिकारी इस हमले को देश के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला मानते हैं।
इस मामले की जांच को कनाडा के इतिहास की सबसे बड़ी और जटिल जांचों में शामिल किया गया है। 2010 में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस जॉन मेजर की अध्यक्षता वाले आयोग ने मामले की जांच में सामने आई सुरक्षा और खुफिया तंत्र से जुड़ी कई कमियों का भी उल्लेख किया था।
पीएम मोदी समेत कई अधिकारियों को भेजी गई चिट्ठी
संजय लाजर की ओर से लिखे गए पत्र की प्रतियां भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दोनों देशों के विदेश मंत्रियों, कनाडा के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। परिवारों की मांग है कि मामले में उपलब्ध संभावित सुरागों की नए सिरे से समीक्षा की जाए और जांच को आगे बढ़ाने के विकल्पों पर विचार किया जाए।
फिलहाल, जांच की स्थिति में किसी औपचारिक बदलाव की सार्वजनिक पुष्टि कनाडाई पुलिस की ओर से नहीं की गई है। इसलिए मामले में अंतिम निर्णय को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।






