गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में वर्ष 2016 के चर्चित दलित उत्पीड़न मामले में अधिकांश आरोपियों के निचली अदालत से बरी होने के फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने फैसले पर गहरी नाराजगी जताते हुए पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है।
मायावती ने कहा कि स्थानीय अदालत द्वारा मार्च में दिए गए फैसले में 40 आरोपियों में से 35 को बरी कर दिया गया। उनके अनुसार, इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने के लिए पीड़ित दलित परिवारों को आर्थिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इससे बहुजन समाज के लोगों में असुरक्षा और चिंता का माहौल बना हुआ है।
‘मैं खुद पीड़ितों से मिलने ऊना गई थी’
मायावती ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि इस मामले से उनका व्यक्तिगत जुड़ाव भी रहा है। उन्होंने कहा कि घटना के बाद वह स्वयं ऊना जाकर पीड़ित परिवारों से मिली थीं और पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद राज्य सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि देशभर में व्यापक विरोध और आक्रोश के बावजूद बड़ी संख्या में आरोपियों का बरी हो जाना चिंताजनक है। उनके मुताबिक, यह दलितों के हितों, सुरक्षा और न्याय के प्रति सरकार की कथित उदासीनता को दर्शाता है।
हाईकोर्ट में चुनौती की मांग
बसपा प्रमुख ने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि वे निचली अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में प्रभावी ढंग से चुनौती दे सकें।
मायावती के इस बयान के बाद ऊना दलित उत्पीड़न मामला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। वहीं, मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे किस दिशा में बढ़ती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
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