Donald Trump तीन दिवसीय चीन दौरे के बाद शुक्रवार को अमेरिका लौट गए। ट्रंप ने इस यात्रा को “ऐतिहासिक” और “बेहद सफल” बताया, लेकिन कई दौर की बैठकों के बावजूद अमेरिका और चीन के बीच किसी बड़े औपचारिक समझौते का ऐलान नहीं किया गया।
इस दौरान ट्रंप और Xi Jinping के बीच ईरान युद्ध, ताइवान, ट्रेड, टैरिफ, रेयर अर्थ मिनरल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चिप टेक्नोलॉजी जैसे संवेदनशील वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। ट्रंप ने दावा किया कि दोनों देशों ने कई जटिल मुद्दों पर प्रगति की है और द्विपक्षीय रिश्ते पहले से अधिक मजबूत हुए हैं, हालांकि उन्होंने किसी ठोस समझौते का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया।
9 साल बाद चीन पहुंचे ट्रंप
ईरान युद्ध, ट्रेड तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच ट्रंप का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा था। करीब नौ साल बाद चीन पहुंचे ट्रंप के साथ 17 बड़े कारोबारी भी मौजूद थे, जिसके चलते बोइंग विमान, कृषि व्यापार, तकनीकी सहयोग और निवेश से जुड़े बड़े ऐलानों की उम्मीद जताई जा रही थी। हालांकि यात्रा के अंत तक किसी बड़े आर्थिक समझौते की औपचारिक घोषणा नहीं हुई।
इसके बावजूद चीन ने ट्रंप के स्वागत में भव्य कूटनीतिक आतिथ्य दिखाया। रेड कार्पेट स्वागत, स्टेट डिनर और झोंगनानहाई में विशेष मेजबानी के जरिए बीजिंग ने दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता का संदेश देने की कोशिश की।
ट्रंप का दावा- चीन खरीदेगा 200 बोइंग विमान
चिनफिंग से मुलाकात के बाद ट्रंप ने इंटरव्यू में दावा किया कि चीन 200 बोइंग जेट खरीदने और अमेरिका में सैकड़ों अरब डॉलर के निवेश पर सहमत हुआ है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच कई रणनीतिक मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत हुई।
ट्रंप के अनुसार ईरान युद्ध को लेकर भी दोनों देशों की सोच काफी हद तक समान है। उन्होंने कहा कि दोनों नेता चाहते हैं कि संघर्ष समाप्त हो, हॉरमुज जलडमरूमध्य खुला रहे और ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके।
ट्रंप ने यह भी कहा कि चिनफिंग ने ईरान संकट को सुलझाने में मदद करने और ईरान को हथियार न देने का भरोसा दिया है। हालांकि चीन की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। चीन ने अपने बयान में केवल व्यापक सहयोग, स्थिरता और शांति बनाए रखने की बात दोहराई।
जिनपिंग ने स्वीकार किया अमेरिकी दौरे का निमंत्रण
ट्रंप ने बताया कि चिनफिंग ने 24 सितंबर को प्रस्तावित अमेरिकी यात्रा का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। इसे दोनों देशों के बीच संवाद जारी रहने का संकेत माना जा रहा है।
टैरिफ और ट्रेड डील पर नहीं बनी बात
बीते वर्ष अक्टूबर में अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर को कम करने के लिए अस्थायी समझौता हुआ था। इसके तहत अमेरिका ने चीनी उत्पादों पर प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ को रोका था, जबकि चीन ने दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर सख्ती कुछ हद तक कम की थी।
इस बार भी उम्मीद थी कि टैरिफ और रेयर अर्थ मिनरल्स पर कोई नई डील सामने आएगी, लेकिन दौरे के दौरान ऐसा कोई औपचारिक समझौता नहीं हो सका।
ईरानी तेल खरीदने वाली चीनी कंपनियों पर राहत के संकेत
ट्रंप ने यह भी संकेत दिए कि अमेरिका ईरानी तेल खरीदने वाली चीनी कंपनियों पर लगे प्रतिबंधों में राहत दे सकता है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर चिनफिंग से चर्चा हुई है और जल्द फैसला लिया जा सकता है।
विश्लेषण कंपनी केप्लर के अनुसार, वर्ष 2025 में ईरान का औसत तेल निर्यात करीब 16.9 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जिसमें लगभग 90 प्रतिशत तेल चीन ने खरीदा।
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