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राजनाथ सिंह ने अमेरिका को दी चेतावनी: कहा- पाकिस्तान को संवेदनशील तकनीक दी तो तीसरे देश में जा सकती है

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को अमेरिकी सैन्य सहायता और आधुनिक तकनीक दिए जाने के मुद्दे पर अमेरिका के सामने भारत की चिंता स्पष्ट रूप से रखी है। उन्होंने चेताया है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली संवेदनशील अमेरिकी तकनीक किसी तीसरे देश तक पहुंच सकती है। यह मुद्दा भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दरअसल, 28 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के सेबू में 13वीं आसियान डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग-प्लस यानी ADMM-Plus के दौरान राजनाथ सिंह ने अमेरिका के वॉर सेक्रेटरी पीट हेगसेथ से मुलाकात की। इस बैठक में भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग के साथ पाकिस्तान को एफ-16 लड़ाकू विमानों के लिए सहायता दिए जाने का मुद्दा भी उठा।

रिपोर्टों के अनुसार, राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को एफ-16 कार्यक्रम से संबंधित उन्नत सहायता पैकेज देने के अमेरिकी फैसले पर भारत का विरोध दर्ज कराया। भारत की चिंता सिर्फ विमानों के रखरखाव तक सीमित नहीं है, बल्कि उनसे जुड़ी संवेदनशील तकनीक, एवियोनिक्स, संचार प्रणालियों और अन्य सैन्य उपकरणों की सुरक्षा को लेकर भी है।

तीसरे देश तक तकनीक पहुंचने की आशंका

राजनाथ सिंह ने अमेरिकी पक्ष को आगाह किया कि पाकिस्तान को उपलब्ध कराई जाने वाली संवेदनशील तकनीक किसी तीसरे देश तक पहुंच सकती है। मीडिया रिपोर्टों में इस संदर्भ में चीन की संभावित भूमिका की ओर संकेत किया गया है, हालांकि इस आशंका को लेकर कोई सार्वजनिक आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

भारत के लिए यह चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आधुनिक लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक और उपकरण सैन्य अभियानों की क्षमता तथा रणनीतिक जानकारी से जुड़े होते हैं। ऐसी तकनीक की सुरक्षा प्रभावित होने पर क्षेत्रीय सैन्य संतुलन और अमेरिका की तकनीकी सुरक्षा से जुड़े सवाल उठ सकते हैं।

पाकिस्तान को एफ-16 सहायता पैकेज पर विवाद

अमेरिका की ओर से पाकिस्तान के एफ-16 बेड़े के रखरखाव और उन्नयन से जुड़ा सहायता पैकेज भी इस चर्चा के केंद्र में है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस पैकेज में एवियोनिक्स से जुड़े सुधार, क्रिप्टोग्राफिक मॉड्यूल, मिशन प्लानिंग उपकरण, स्पेयर पार्ट्स, सिम्युलेटर, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता शामिल हैं।

भारत लंबे समय से पाकिस्तान को अमेरिकी सैन्य सहायता दिए जाने पर अपनी सुरक्षा संबंधी चिंताएं उठाता रहा है। नई दिल्ली का मानना है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य सहायता के क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

आतंकवाद के मुद्दे पर भी दो टूक संदेश

बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मापदंड नहीं अपनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उन देशों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का आह्वान किया, जो आतंकवादी संगठनों को समर्थन, प्रशिक्षण या आर्थिक मदद देते हैं।

अमेरिकी पक्ष की ओर से भी भारत के सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में समर्थन दोहराया गया। दोनों नेताओं ने वैश्विक आतंकवाद से निपटने की साझा प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों पर भी चर्चा

पाकिस्तान को सैन्य सहायता के मुद्दे पर मतभेदों के बावजूद, राजनाथ सिंह और पीट हेगसेथ ने भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने दस वर्षीय रक्षा सहयोग ढांचे के तहत सैन्य आदान-प्रदान, तकनीक साझा करने, समुद्री सुरक्षा और रक्षा उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।

राजनाथ सिंह ने बैठक के बाद कहा कि भारत और अमेरिका की मजबूत साझेदारी स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।

कुल मिलाकर, इस बैठक में भारत ने एक ओर अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान को संवेदनशील सैन्य तकनीक उपलब्ध कराने से जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर अपनी चिंता भी दर्ज कराई। अब इस मुद्दे पर अमेरिकी पक्ष की आगे की कार्रवाई और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की दिशा पर नजर रहेगी।

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