उत्तर प्रदेश कैडर के 2006 बैच के IAS अधिकारी प्रांजल यादव एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वाराणसी विधान परिषद यानी MLC चुनाव की मतगणना के दौरान उनकी भूमिका को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। बीजेपी प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने चुनाव पर्यवेक्षक के तौर पर तैनात प्रांजल यादव पर मतगणना में पक्षपात और अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। खास बात यह है कि करीब 12 साल पहले भी उनका नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी रैली से जुड़े विवाद में सामने आया था।
MLC चुनाव की मतगणना के दौरान क्यों हुआ विवाद?
वाराणसी स्नातक MLC सीट की मतगणना के दौरान पांचवें राउंड में उस समय हंगामा शुरू हो गया, जब बीजेपी प्रत्याशी केदारनाथ सिंह और उनके समर्थकों ने काउंटिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाए। बीजेपी पक्ष का आरोप था कि उनके मतगणना एजेंट भोजन के लिए बाहर गए हुए थे और इसी दौरान उनकी अनुपस्थिति में पांचवें राउंड की गिनती करा दी गई।
इस घटनाक्रम के बाद बीजेपी प्रत्याशी और समर्थकों ने मतगणना केंद्र के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान चुनाव पर्यवेक्षक IAS प्रांजल यादव के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। विवाद बढ़ने पर प्रशासनिक अधिकारियों और कमिश्नर के हस्तक्षेप के बाद पांचवें राउंड की दोबारा गिनती कराने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।
बीजेपी नेताओं ने प्रांजल यादव पर समाजवादी पार्टी के पक्ष में काम करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, इन आरोपों को स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
2014 में मोदी की रैली को लेकर भी आए थे चर्चा में
प्रांजल यादव का नाम इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी सुर्खियों में आया था। उस समय वह वाराणसी के जिलाधिकारी और चुनाव अधिकारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। नरेंद्र मोदी वाराणसी लोकसभा सीट से बीजेपी के उम्मीदवार थे।
चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने वाराणसी के बेनियाबाग मैदान में नरेंद्र मोदी की जनसभा आयोजित करने की अनुमति मांगी थी। लेकिन जिला प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए इस सभा की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
इस फैसले के बाद बीजेपी ने कड़ा विरोध जताया था। अरुण जेटली और अमित शाह सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने प्रांजल यादव की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे और निर्वाचन आयोग से उन्हें हटाने की मांग की थी। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने बीजेपी के पक्षपात के आरोपों को स्वीकार नहीं किया था और कहा था कि मामले के तथ्यों की जांच की जा रही है।
कौन हैं IAS प्रांजल यादव?
प्रांजल यादव उत्तर प्रदेश कैडर के 2006 बैच के IAS अधिकारी हैं। उन्होंने IIT रुड़की से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उन्होंने रामपुर, हाथरस, महाराजगंज और आजमगढ़ सहित कई जिलों में जिम्मेदारियां संभालीं।
फरवरी 2013 से अगस्त 2015 के बीच वह वाराणसी के जिलाधिकारी रहे। उनके कार्यकाल के दौरान शहर में अतिक्रमण हटाने, सड़कों के चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था सुधारने जैसे काम भी चर्चा में रहे।
इसके बाद उन्होंने शासन स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। मौजूदा समय में वह उत्तर प्रदेश के MSME और निर्यात प्रोत्साहन विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत बताए जा रहे हैं।
पुराने विवाद और नई भूमिका ने फिर बढ़ाई चर्चा
प्रांजल यादव का नाम दो अलग-अलग चुनावी घटनाक्रमों के कारण चर्चा में आया है। वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी की बेनियाबाग रैली की अनुमति से जुड़ा मामला और अब वाराणसी स्नातक MLC चुनाव की मतगणना के दौरान उनकी भूमिका पर उठे सवाल।
हालांकि, दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं। मौजूदा विवाद में बीजेपी की ओर से लगाए गए आरोपों और प्रशासनिक स्तर पर हुई कार्रवाई को अलग-अलग समझना जरूरी है।#IASPranjalYadav #VaranasiMLCElection #PranjalYadav #ModiRally #VaranasiNews #UPNews #IASOfficer #वाराणसी #प्रांजलयादव






