अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है, लेकिन इस पूरे प्रकरण में बैंक कर्मियों के खिलाफ अब तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जबकि विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बैंक कर्मचारियों की जिम्मेदारी और उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया था। इसके बावजूद पुलिस ने अभी तक किसी बैंक अधिकारी या कर्मचारी को आरोपी नहीं बनाया है।
अब तक किन लोगों पर हुई कार्रवाई
इस मामले में अब तक ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय के करीबी बताए जाने वाले टिन्नू यादव, गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव और छह गणनाकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। वहीं बैंक कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई केवल पूछताछ तक सीमित रही है।
बैंक की थी निगरानी की जिम्मेदारी
SIT की जांच में सामने आया कि मंदिर में आने वाली दान राशि की गणना के लिए ट्रस्ट और बैंक के बीच बाकायदा एक एमओयू (MoU) किया गया था। इस व्यवस्था के तहत पूरी प्रक्रिया की निगरानी करना बैंक की भी जिम्मेदारी थी।
जांच के दौरान दो बैंक कर्मचारियों के नाम भी सामने आए, जिनकी ड्यूटी गणना प्रक्रिया में लगाई गई थी। बाद में उन्हें इस जिम्मेदारी से हटा भी दिया गया था। इसके बावजूद अब तक उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।
कई दौर की पूछताछ, लेकिन कार्रवाई नहीं
पुलिस ने इस मामले में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों से कई बार पूछताछ की है। इससे पहले SIT भी उनसे विस्तृत पूछताछ कर चुकी है। दूसरी ओर बैंक अपने स्तर पर विभागीय जांच करा रहा है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई अभी तक केवल पूछताछ तक ही सीमित है।
ऐसे समय में, जब गणना प्रभारी जेल भेजे जा चुके हैं और ट्रस्ट के दो वरिष्ठ पदाधिकारी भी इस्तीफा दे चुके हैं, बैंक कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
रिमांड के दौरान सामने आए नए नाम
पुलिस ने सबसे पहले आरोपी अविनाश शुक्ला और उसके बाद अनुकल्प, लवकुश तथा करुणेश को रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी।
सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान आठ से दस अन्य लोगों के नाम भी सामने आए। इनमें से पांच लोगों से पुलिस पूछताछ कर चुकी है। बताया जा रहा है कि इनमें एक-दो लोगों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है, जबकि कुछ गणनाकर्मी भी जांच के दायरे में हैं।
अविनाश शुक्ला निभाता था मुख्य भूमिका
जांच में यह भी सामने आया है कि चोरी की वारदातों में अविनाश शुक्ला की सबसे अहम भूमिका थी। आरोप है कि वही सबसे अधिक बार दान की रकम निकालता था, जबकि गिरोह के अन्य सदस्य उसे सुरक्षा कवच देकर खड़े रहते थे।
SIT की जांच के अनुसार मनीष और रमाशंकर ने भी कई मौकों पर रकम निकालने में भूमिका निभाई। पुलिस की विवेचना में भी इन तथ्यों की पुष्टि होने की बात सामने आई है।
40 दिनों में 70 बार चोरी का दावा
SIT की जांच के अनुसार लगभग 40 दिनों के दौरान दान राशि की करीब 70 बार चोरी की गई। सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण में अविनाश शुक्ला करीब 50 बार रकम निकालते हुए दिखाई दिया।
पुलिस ने भी सीसीटीवी फुटेज को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में अपनी विवेचना में शामिल किया है। फुटेज की रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई कि अधिकांश मामलों में रकम निकालने का काम अविनाश शुक्ला ने ही किया।
रिमांड के दौरान पूछताछ में भी अविनाश ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि चोरी की रकम निकालने की जिम्मेदारी अक्सर उसी को दी जाती थी, क्योंकि वह बिना संदेह पैदा किए रकम बाहर ले जाने में सक्षम माना जाता था।
फिलहाल SIT अपनी विस्तृत जांच को अंतिम रूप देने में जुटी है, जबकि पुलिस की विवेचना अभी जारी है और मामले में आगे भी नई जानकारियां सामने आने की संभावना बनी हुई है।








