हरियाणा के सरकारी विभागों से जुड़े 590 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट ने कई अहम खुलासे किए हैं। जांच के अनुसार आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 शाखा से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के जरिए नगर निगम पंचकूला और नगर परिषद कालका के सरकारी खातों से करोड़ों रुपये निकाले गए।
चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि सरकारी धन निकालने के लिए फर्जी दस्तावेज, बैंकिंग प्रक्रियाओं में कथित हेरफेर और तकनीकी खामियों का इस्तेमाल किया गया।
पंचकूला नगर निगम के खाते से 22 बार हुआ ट्रांजेक्शन
CBI की जांच में नगर निगम पंचकूला का बैंक खाता संख्या 10252520450 प्रमुख जांच के दायरे में है। यह खाता 29 अक्टूबर 2025 को खोला गया था और कुछ ही महीनों बाद इसमें संदिग्ध लेनदेन शुरू हो गए।
चार्जशीट के अनुसार 27 नवंबर 2025 को इस खाते से पहली बार 10 करोड़ रुपये निकाले गए। इसके बाद कुल 22 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से सरकारी धन को कथित तौर पर निजी फर्मों के खातों में स्थानांतरित किया गया।
कालका नगर परिषद के खाते से भी करोड़ों की निकासी
जांच में यह भी सामने आया कि नगर परिषद कालका का बैंक खाता भी कथित फर्जीवाड़े का शिकार बना।
CBI के अनुसार, नवंबर 2025 के पहले सप्ताह में खोले गए इस खाते से एक कथित फर्जी डेबिट नोट के माध्यम से 18.46 करोड़ रुपये निकाल लिए गए।
चार्जशीट में कहा गया है कि 20 जनवरी 2026 को दोपहर 2:41 बजे चेक संख्या 000071 के जरिए यह पूरी राशि एक साथ निकाली गई।
फर्जी डेबिट नोट और कथित फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप
CBI की चार्जशीट के मुताबिक, इस ट्रांजेक्शन को अंजाम देने के लिए एमसी/केएलके/नील मेमो नंबर वाला एक कथित फर्जी डेबिट नोट इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि इस दस्तावेज पर नगर परिषद के अधिकारियों के कथित फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे।
वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर बनाए गए कथित फर्जी चेक
जांच एजेंसी के अनुसार, कथित घोटाले में आयुक्त और वरिष्ठ लेखा अधिकारी सहित कई उच्च अधिकारियों के नाम से कथित फर्जी हस्ताक्षरों वाले चेक तैयार किए गए।
चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि धनराशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजने के बजाय पहले बैंक के जनरल लेजर (GL) अकाउंट में स्थानांतरित की जाती थी। ऐसा कथित तौर पर इसलिए किया जाता था ताकि बैंकिंग सिस्टम में किसी प्रकार का अलर्ट जारी न हो।
बिना वास्तविक चेक के भी जारी हुई करोड़ों की रकम
CBI का आरोप है कि कई मामलों में किसी वास्तविक चेक का उपयोग किए बिना केवल कथित फर्जी डेबिट नोट के आधार पर ही करोड़ों रुपये जारी कर दिए गए। जांच एजेंसी अब पूरे लेनदेन की प्रक्रिया, बैंकिंग रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही है।








