मस्कट/तेहरान: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात को सुरक्षित और निर्बाध बनाए रखने की दिशा में ओमान ने एक नया प्रस्ताव ईरान के साथ साझा किया है। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अधिक स्थिर एवं संतुलित व्यवस्था तैयार करना है।
प्रस्ताव के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य का संयुक्त प्रबंधन ओमान और ईरान द्वारा किए जाने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर किसी अनिवार्य शुल्क के बजाय स्वैच्छिक योगदान की व्यवस्था लागू करने की बात कही गई है।
यदि यह प्रस्ताव अमल में आता है, तो होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का एकाधिकार कम हो सकता है और समुद्री मार्ग के संचालन में अधिक संतुलित एवं सहयोगात्मक मॉडल विकसित होने की संभावना है। इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और वैश्विक व्यापार को भी राहत मिल सकती है।
जहाज संचालकों को मिलेगी विकल्प की सुविधा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्ताव में जहाज संचालकों को यह विकल्प देने की बात कही गई है कि वे स्वैच्छिक शुल्क ओमान या ईरान, किसी भी देश को जमा कर सकते हैं। इससे दोनों देशों की भागीदारी सुनिश्चित होगी और समुद्री मार्ग के संचालन में पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
मलक्का स्ट्रेट मॉडल से ली गई प्रेरणा
इस प्रस्ताव को दक्षिण-पूर्व एशिया के मलक्का जलडमरूमध्य की व्यवस्था से प्रेरित बताया जा रहा है। वहां इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर संयुक्त रूप से समुद्री सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और खोज एवं बचाव अभियानों का संचालन करते हैं। इन गतिविधियों के लिए जहाज संचालकों से स्वैच्छिक योगदान लिया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू होती है, तो यह क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ समुद्री व्यापार की सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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